हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
उत्तराखंड की लोक संस्कृति में रचा बसा सबसे प्रसिद्ध फूलदेई (फुलफुमाई) का त्योहार आने वाला है। कुछ दिनों पहले से ही इसकी तैयारियां शुरू हो गई हैं। इस त्योहार पर छोटे-छोटे बच्चे टोकरी में फूल लेकर लोगों की देहली पर डालते हैं और बदले में दाल, चावल, गुड़ आदि ले जाते हैं। ऐसे में पारंपरिक रूप से तैयार की गई फुलारी टोकरियों की मांग बढ़ गई है।
सीमांत जनपद चमोली के किरूली (पीपलकोटी) के रहने वाले हस्तशिल्पि दरमानी लाल और उनके पुत्र राजेन्द्र बड़वाल फुलारियों की रिंगाल की टोकरी को तैयार कर रहे हैं। पहली खेप बनकर तैयार हो गई है और भेज भी दिया है।
गौरतलब है कि रिंगाल के इन बेजोड़ हस्तशिल्पियों ने अभी तक रिंगाल से विभिन्न मंदिरों के डिजायन, फूलों की टोकरी, प्रसाद की टोकरी, लैंप शेड, कलमदान, फूलदान, चाय ट्रे, नमकीन ट्रे, डस्टबिन, छंतोली, चिड़िया का घोसला सहित लगभग 100 से अधिक डिजायन तैयार किए हैं।
अगर आप चमोली में किरूली के पास से गुजरते हैं तो आरडी पहाड़ी हस्तशिल्प उत्पाद आपको मिल सकते हैं। राजेंद्र बड़वाल के हुनर के कायल लोग बड़ी दूर से उनके पास ये टोकरियां लेने आते हैं। सच में, इन टोकरियों को देखने से ही लगता है कि जैसे हमारी संस्कृति का अनोखा संसार अपने आप में समेटे हुए है।



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