हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
प्राइमरी शिक्षा को लेकर उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब पांचवीं और आठवीं कक्षाओं में छात्र-छात्राओं को फेल नहीं करने और आगे की कक्षाओं में भेजने की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। हालांकि जो छात्र-छात्राएं फेल होंगे, उन्हें पास होने के लिए दो महीने के भीतर दोबारा एक मौका उपलब्ध कराया जाएगा।
आपको बता दें कि बुधवार को उत्तराखंड नि:शुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार नियमावली-2019 में संशोधन के फैसले पर कैबिनेट ने अपनी मुहर लगा दी। गौर करने वाली बात यह है कि यह व्यवस्था प्रदेश में हजारों की संख्या में सरकारी और निजी स्कूलों पर लागू होगी। बुधवार को राज्य कैबिनेट ने और भी कई बड़े फैसले लिए हैं।
इसके तहत देहरादून मसूरी विकास प्राधिकरण में 78 पदों को मंजूरी दी गई है। उच्च शिक्षा में हरिद्वार यूनिवर्सिटी ऑफ इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी रुड़की को विश्वविद्यालय की मंजूरी मिल गई है। कैबिनेट ने पूरे प्रदेश में निजी नाप भूमि में खनन के पट्टाधारकों को राहत दी है। उन्हें खनन पट्टे देने की प्रक्रिया सरल की गई है।
वहीं, कार्बेट टाइगर रिजर्व में 377.87 वर्ग किमी क्षेत्र को ईको सेंसिटिव जोन घोषित करने पर मुहर लगा दी गई है। इसके साथ ही इस जोन के दायरे से सभी 47 गांव बाहर किए गए हैं।
आपको बता दें कि सीएम रावत की कैबिनेट की बैठक में कुल 13 प्रस्तावों पर चर्चा हुई और इनमें से 10 पर फैसले लिए गए। बताया गया है कि आगामी बजट सत्र तीन से 6 मार्च तक गैंरसैंण में होगा।


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