प्रत्यक्षदर्शी छात्रों ने बताया कि सुबह की कक्षाएं चल रही थीं, तभी अचानक भालू विद्यालय परिसर में दिखाई दिया। कुछ ही पलों में वह स्कूल भवन के अंदर तक पहुंच गया और कक्षा के दरवाजे तक आ गया। खतरे को भांपते हुए कक्षा में मौजूद बच्चों ने तत्काल दरवाजा बंद कर लिया, जिससे वे सुरक्षित बच सके।
इसी दौरान भालू ने बाहर मौजूद एक छात्र पर नाखूनों से हमला कर दिया। हमले में छात्र के कपड़े फट गए और भालू उसे झाड़ियों की ओर घसीट ले गया। छात्र की चीख-पुकार से पूरे विद्यालय में दहशत फैल गई।
छात्र की आवाज सुनकर दो अन्य छात्रों, एक छात्रा और एक शिक्षक ने साहस दिखाते हुए शोर मचाया और झाड़ियों की ओर दौड़ पड़े। उनके शोरगुल से घबराकर भालू छात्र को छोड़कर जंगल की दिशा में भाग गया। इसके बाद घायल छात्र को सुरक्षित बाहर निकालकर तत्काल उपचार के लिए भेजा गया। सौभाग्य से छात्र की जान बच गई, हालांकि उसे काफी चोटें आई हैं।
घटना के बाद विद्यालय में भय और तनाव का माहौल बना हुआ है। शिक्षकगणों ने बताया कि इससे पहले भी कई बार वन विभाग को क्षेत्र में भालुओं की सक्रियता और आवाजाही की सूचना दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद न तो नियमित गश्त बढ़ाई गई और न ही विद्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए कोई ठोस कदम उठाए गए।
इस घटना को लेकर अभिभावकों और स्थानीय ग्रामीणों में गहरा आक्रोश है। उनका कहना है कि बच्चों की जान से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। लोगों ने शासन-प्रशासन और वन विभाग से मांग की है कि विद्यालयों और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास वन्यजीवों की कड़ी निगरानी की जाए, सुरक्षा घेराबंदी की जाए और नियमित गश्त सुनिश्चित की जाए।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में इस तरह की घटनाएं और भी गंभीर रूप ले सकती हैं। फिलहाल अभिभावक अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित हैं और विद्यालय प्रशासन से भी सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग कर रहे हैं।


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