उत्तराखंड सरकार ने आज चार आईएएस और दो आईपीएस अफसरों के तबादले कर दिए हैं। पिथौरागढ़ के डीएम आशीष कुमार चैहान को पौड़ी का नया डीएम बनाया गया है। जबकि पौड़ी के डीएम विजय कुमार जोगदण्डे को बाध्य प्रतीक्षा में रखा गया है। बागेश्वर की डीएम रीना जोशी को पिथौरागढ़ का नया डीएम बनाया गया है। जबकि अनुराधा पाल जो कि पिथौरागढ़ की मुख्य विकास अधिकारी थी उनको बागेश्वर का डीएम बनाया गया है।
पौडी के एसएसपी यशवंत सिंह रावत को बाध्य प्रतीक्षा में डाल दिया गया है। अब चमोली की एसपी श्वेता चैबे को पौड़ी गढ़वाल का नया कप्तान बनाया गया है। पौड़ी डीएम और एसएसपी को हटाने की मुख्य वजह अंकिता भंडारी हत्याकांड में स्थानीय प्रशासन की भूमिका को माना जा रहा है। डीएम और कप्तान की भूमिका को लेकर प्रशासनिक लापरवाही के इल्जाम लग रहे थे और यह भी कहा जा रहा था कि मुख्यमंत्री डीएम और कप्तान से बहुत खुश नहीं थे।
अपर सचिव कार्मिक ललित मोहन रयाल द्वारा जारी तबादला आदेश के अनुसार चार आईएएस और दो आईपीएस अफसरों के ट्रांसफर किए गए हैं। लेकिन सबसे अधिक चर्चा पौड़ी गढ़वाल के डीएम और एसएसपी को हटाकर बाध्य प्रतीक्षा में डालने की हो रही।
यह ट्रांसफर ऐसे समय किए गए जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी दो दिन के लिए राज्य से बाहर थे वह सूरजकुंड में चिंतन शिविर में भाग ले रहे थे। इसके बाद भी पौड़ी के डीएम जोगदण्डे और एसएसपी यशवंत सिंह रावत को बाध्य प्रतीक्षा में डाल दिया गया है।
जिस तरह से अंकिता भंडारी मर्डर केस में जितनी जल्दी में बुलडोजर से एक्शन किया गया उससे कहीं न कहीं इस मामले में सबूतों से छेड़छाड़ का आरोप लगा और कई अवसरों पर डीएम जोगदण्डे ने गैर जरूरी बयान देकर सरकार को असहज कराया और कप्तान भी बड़बोले बयान देते दिखे।
पहले उत्तराखंड की दिवंगत बेटी अंकिता भंडारी मामले में दो पटवारियों पर इसकी गाज गिरी थी और तब कहा जा रहा था कि राज्य सरकार सिर्फ खानापूर्ति कर रही है। जबकि असली जिम्मेदार अधिकारी अभी अपने पद पर कायम हैं।
लोग यह भी कह रहे थे कि पौड़ी के डीएम विजय जोगदण्डे के संज्ञान में गंगा भोगपुर से लेकर गांव तल्ला बनास तक दर्जनों अवैध रिसाॅर्ट चलने की जानकारी है। गांव वालों ने कई बार इसकी शिकायत डीएम से की लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव वालों ने बताया कि पिछले दो साल से पौड़ी के डीएम ने गांव वालों की जमीन पर अवैध कब्जे समेत किसी भी मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है।
अब आने वाले अधिकारियों को यह देखना होगा कि यहां पर जितने भी अवैध तरीके से रिजाॅर्ट या अन्य कोई गतिविधियां चल रही है उन पर ठोस कार्रवाई होनी चाहिए। तथा यहां के लोगों की जो शिकायतें है उन पर उचित कार्रवाई होनी चाहिए और जो लोग गैर कानूनी काम करते हैं उनको दंडित किया जाना चाहिए। तभी सही मायनों में यह तबादले सही ठहराये जायेंगे।


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