ऊधमसिहनगर के जसपुर निवासी अर्पित चौहान ने यूपीएससी परीक्षा में 20वां स्थान हासिल किया है। उन्होंने अपने तीसरे प्रयास में यह स्थान हासिल किया। इससे उनके परिवार में खुशी का माहौल है उनकी कालोनी के लोग भी उनके चयन से काफी खुश हैं और उनके घर में बधाई देने वाले लोगों की भीड़ लगी हुई है। अर्पित चौहान के पिता बलकरन सिंह चौहान प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक है जबकि उनकी माता अनीता चौहान जीजीआईसी में प्रवक्ता है।
अर्पित चौहान ने अपनी 12वीं तक की पढ़ाई काशीपुर के मारिया स्कूल से की। उसके बाद पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से बीटेक किया। उन्होंने बीटेक के बाद यूपीएससी की परीक्षा दी थी और अपने पहले प्रयास में सफल नहीं हो पाये थे। जब उन्होंने दूसरी बार परीक्षा दी तो तब उन्हें 297वीं रैंक प्राप्त हुई। लेकिन इस रैंक में उन्हें आईएस नहीं मिल सकता था और वह आईएस बनना चाहते थे। उन्होंने फिर कोशिश की और अपने तीसरे प्रयास में उन्हें 20वीं रैंक प्राप्त हुई। कहते हैं कि कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती है और अर्पित ने ऐसा करके दिखा दिया है।
अर्पित चौहान ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता पिता और गुरुजनों को दिया है। उनकी बड़ी बहन अंकिता चौहान ने पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय से एमटेक की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और वह आजकल प्राइवेट सेक्टर मुंबई में नौकरी कर रही हैं।
अगर किसी में कर गुजरने की इच्छा शक्ति हो तो वह कोई भी काम कर सकता है और आशु ने इस बात को साबित करके दिखाया है। चंपावत जिले के टनकपुर आमबाग के रहने वाले आशु पंत ने यूपीएससी परीक्षा में 193वीं रैंक हासिल की है। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यह सफलता हासिल की।
आशु का यूपीएससी में चयन होने से उनके परिवार और टनकपुर वासियों में जश्न का माहौल है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता और अपने गुरुजनों को दिया है। एक बेहद सामान्य परिवार से आने वाले आशु के पिता वन निगम में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं और मां शांति पंत गृहिणी है।
आशु ने अपनी हाई स्कूल की शिक्षा टनकपुर के सेंट फ्रांसिस से की और उन्होंने 10वीं में अपने जिले में टाॅप किया था। उसके बाद 12वीं की पढ़ाई केंद्रीय विद्यालय से की और उन्होंने 12वीं में भी उत्तराखंड टाॅप किया। उसके बाद उन्होंने एमएनआईटी से बीटेक किया।
बीटेक करने के बाद उन्होंने साफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी करना शुरू कर दिया था। लेकिन इस दौरान उनका रूझान यूपीएससी की तरफ हुआ और उन्होंने इसकी तैयारी करनी शुरू कर दी और अपने दूसरे ही प्रयास में वह इस परीक्षा में सफल हो गये।


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