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पौड़ी जिले में प्रशासन की अनोखी पहल, ‘बम वर्षा’ से रुकेगा इंसानों और जानवरों का संघर्ष!

पौड़ी के जिलाधिकारी धीरज गर्ब्याल का प्रयास है कि आगामी वर्षों में पौड़ी में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली फ्लाइंग मशीनों और पैरा ग्लाइडरों के जरिये सतपुली, कोट्द्वार और पौड़ी क्षेत्र के जंगली तथा उजाड इलाकों में हवा से "बीज वर्षा" की जाए।

उत्तराखंड में मानव और वन्यजीव संघर्ष कोई नई बात नहीं। हाल के वर्षों में यह संघर्ष बढ़ा है। जंगल में भोजन न मिल पाने के कारण बड़ी संख्या में जंगली जानवर रिहायशी इलाकों का रुख करने लगे हैं। ऐसे में आए दिन मानव-जानवर संघर्ष की घटनाएं देखने को मिल रही है। ऐसे में पौड़ी जिला प्रशासन ने एक अनोखा प्रयोग किया है।

पौड़ी जिला प्रशासन ने एडवेंचर टूरिज्म को बीज बम वर्षा अभियान से जोड़ने की पहल की है। दरअसल, मुख्य सड़क मार्ग पर खाने की कमी के चलते नहीं बल्कि दुर्घटना के चलते बड़ी संख्या में बंदरों और दूसरे जंगली जानवरों की मौत हो रही थी। वहीं जंगलों में पर्याप्त भोजन न मिल पाने के कारण जंगली जानवर आबादी वाले इलाकों का रुख कर रहे हैं। इसलिए पौड़ी जिला प्रशासन ने फैसला लिया है कि जंगलों में जानवरों का आहार बढ़ाने का प्रयास किया जाए।

इसके लिए जंगलों में सब्जी और फलदार वृक्षों की संख्या बढ़ाने की योजना बनाई गई है। इसके लिए हिमालयन एरोस्पोर्ट्स एसोसिएशन (हासा), जिला प्रशासन पौड़ी गढ़वाल और हिमालयन पर्यावरण जड़ी बूटी एग्रो संस्थान (जाड़ी) का बीज बम अभियान साथ आए हैं। कोशिश यह है कि हवा से बीज बम गिराकर जंगलों में सब्जी और फलदार पेड़ों की संख्या बढ़ाई जाए।

रविवार को हासा के पैरामोटर पायलट विनय सिंह और हर्ष सचान ने आशा रोड़ी तथा मोहंड के बीच सड़क मार्ग से आधा किलोमीटर अंदर जंगल में बीज बम गिराकर इसकी शुरुआत की। इसमें हासा के अध्यक्ष शुभांग रतूड़ी और हासा के उपाध्यक्ष मनीष जोशी ने दोनों पायलटों को जरूरी ग्राउंड सपोर्ट उपलब्ध कराया।

पौड़ी के जिलाधिकारी धीरज गर्ब्याल का प्रयास है कि आगामी वर्षों में पौड़ी में एडवेंचर स्पोर्ट्स के लिए इस्तेमाल की जाने वाली फ्लाइंग मशीनों और पैरा ग्लाइडरों के जरिये सतपुली, कोट्द्वार और पौड़ी क्षेत्र के जंगली तथा उजाड इलाकों में हवा से “बीज वर्षा” की जाए। इस अभियान से पैरा ग्लाइडिंग के शौकीन पर्यटकों को भी जोड़ा जाए। इससे उनकी दिलचस्पी भी इस अभियान में बढ़ेगी।

 

जाड़ी के संस्थापक और बीज बम अभियान के प्रणेता द्वारिका सेमवाल की मदद से इन बीज बमों को तैयार किया गया है। इन बीज बमों की खासियत यह है कि इन्हें हवा से फेंका जा सकता है। जिला प्रशासन ने उम्मीद जताई है कि हासा के इस मुहिम मे जुड़ने से पर्यटक भी बीज बम अभियान से जुड़ेंगे। इन बीज बमों को तैयार करते समय यह भी ध्यान में रखा गया है कि फलों के साथ सब्जियों के भी बीज बम आवश्यक मात्रा में इस्तेमाल किए जाएं ताकि इस वर्ष भी जीव जंतुओं को भोजन उपलब्ध हो सके। जॉय राइड्स में पर्यटकों को बीज के पैकेट्स दिए जाना सुनिश्चित किया गया है। जिससे सतपुली एयरोस्पोर्ट्स का लुत्फ लेने आने वाले पर्यटक भी कुछ बीज बम अपनी हवाई यात्रा के दौरान गिराकर इस अभियान में अपना योगदान दे सकें।

 

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Hill Mail

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