Friday , 4 September 2026
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उत्तराखंड न्यूज़क्राइमदेहरादूनसरोकार

रैगिंग विवाद पर स्पोर्ट्स कॉलेज की बड़ी कार्रवाई: तीन सीनियर छात्र दो सप्ताह के लिए निलंबित, कोच और वार्डन से मांगी रिपोर्ट

हाल ही में कॉलेज में जूनियर छात्रों के साथ रैगिंग किए जाने का मामला सामने आया था। आरोप था कि कुछ सीनियर छात्रों के व्यवहार से जूनियर छात्र मानसिक तनाव में आ गए थे। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि ऋषिकेश निवासी एक छात्र के पिता ने अपने बेटे का दाखिला वापस लेने के लिए कॉलेज प्रशासन को आवेदन दे दिया, जबकि बागेश्वर के एक छात्र के परिजन उसे घर ले गए। इस घटना ने कॉलेज परिसर में छात्रों की सुरक्षा और अनुशासन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।

मामला सार्वजनिक होने के बाद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल जांच शुरू की। प्रधानाचार्य राजेश ममगाईं ने बताया कि प्रारंभिक जांच के आधार पर कक्षा नौ के दो और कक्षा दस के एक छात्र को दो सप्ताह के लिए निलंबित किया गया है। इन छात्रों को फिलहाल घर भेज दिया गया है। साथ ही संबंधित कोच और वार्डन से विस्तृत रिपोर्ट मांगी गई है, ताकि घटना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच की जा सके।

हालांकि प्रधानाचार्य का कहना है कि जांच के दौरान अब तक रैगिंग की पुष्टि नहीं हुई है। उनके अनुसार यह विवाद फुटबॉल खेलते समय छात्रों के बीच हुए आपसी झगड़े के कारण उत्पन्न हुआ, जिससे कुछ जूनियर छात्र मानसिक रूप से परेशान हो गए। बावजूद इसके, अनुशासन बनाए रखने और छात्रों को स्पष्ट संदेश देने के उद्देश्य से संबंधित छात्रों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

उधर, इस मामले के बाद जूनियर छात्रों के अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार, कई अभिभावक जल्द ही बैठक कर कॉलेज प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था और छात्रावास के माहौल पर चर्चा करेंगे। अभिभावकों का कहना है कि यदि बच्चों को सुरक्षित वातावरण नहीं मिलेगा तो उनका भविष्य प्रभावित हो सकता है। वे चाहते हैं कि कॉलेज प्रशासन ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए ठोस कदम उठाए।

इसी बीच देहरादून के सीमा डेंटल कॉलेज में भी रैगिंग की शिकायत की जांच पूरी हो गई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की एंटी रैगिंग हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के बाद गठित जांच समिति ने स्पष्ट किया कि यह मामला रैगिंग का नहीं बल्कि छात्रों के बीच पुरानी रंजिश का था। जांच के दौरान समिति ने छात्रों के बयान दर्ज किए और कॉलेज परिसर के सीसीटीवी फुटेज तथा सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का भी परीक्षण किया।

जांच रिपोर्ट के अनुसार, 23 जून की शाम हुई घटना पहले से चले आ रहे आपसी विवाद का परिणाम थी। किसी भी छात्र ने एंटी रैगिंग समिति, एंटी रैगिंग स्क्वॉड, वार्डन, प्राचार्य या अन्य जिम्मेदार अधिकारी के समक्ष रैगिंग की शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। इसलिए समिति ने रैगिंग के आरोपों को प्रमाणित नहीं माना।

हालांकि समिति ने यह भी माना कि संबंधित छात्रों का व्यवहार कॉलेज की अनुशासन संहिता के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर प्रथम और द्वितीय वर्ष के दो-दो छात्रों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की संस्तुति की गई है। सीमा डेंटल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. पी. नारायण ने जांच रिपोर्ट एचएनबी उत्तराखंड मेडिकल शिक्षा विश्वविद्यालय को भेज दी है। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. आशीष उनियाल ने बताया कि कॉलेज की रिपोर्ट के आधार पर यूजीसी को भी विस्तृत जवाब भेज दिया गया है।

दो अलग-अलग शिक्षण संस्थानों में सामने आए इन मामलों ने एक बार फिर छात्रावासों और शैक्षणिक परिसरों में अनुशासन तथा छात्रों की सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि रैगिंग जैसी घटनाओं पर प्रभावी निगरानी, नियमित काउंसलिंग, सतर्क वार्डन व्यवस्था और सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई ही छात्रों के लिए सुरक्षित एवं सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण सुनिश्चित कर सकती है।

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Hill Mail

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