मीडिया से बातचीत के दौरान महेंद्र भट्ट ने कहा कि जेनी प्रकरण कांग्रेस के शासनकाल का मामला है। उस दौरान जेनी को संतान हुई थी, लेकिन बच्चे के पिता की पहचान को लेकर स्थिति अब तक स्पष्ट नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले में सच्चाई सामने आनी चाहिए और जो भी तथ्य हैं, उन्हें सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
भट्ट ने स्पष्ट किया कि भाजपा किसी पर सीधे आरोप नहीं लगा रही है, बल्कि मामले से जुड़े सवालों के जवाब चाहती है। उन्होंने कहा कि बच्चे का पिता कौन है, यह जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए। यदि उस समय जेनी ने किसी व्यक्ति पर आरोप लगाए थे, तो उसके पीछे कुछ तथ्य जरूर रहे होंगे। ऐसे में उन तथ्यों को भी सामने लाया जाना चाहिए, ताकि पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सके।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने बातचीत में हरक सिंह रावत का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जेनी ने उस समय हरक सिंह रावत का नाम लिया था। हालांकि, बाद में आई डीएनए रिपोर्ट में हरक सिंह रावत से बच्चे का डीएनए मेल नहीं होने की बात कही गई थी। इसके बावजूद भट्ट ने सवाल उठाया कि यदि जेनी उनके घर में रहती थी, तो बच्चे के जन्म के बाद उसके पिता की पहचान जानने की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए थी।
महेंद्र भट्ट ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से काम नहीं चलेगा, बल्कि तथ्यों का सामने आना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि मामले से जुड़े सभी पहलुओं को सार्वजनिक किया जाए, जिससे लोगों के मन में उठ रहे सवालों का जवाब मिल सके।
गौरतलब है कि जेनी प्रकरण उत्तराखंड की राजनीति में पहले भी चर्चा का विषय रहा है। इस मामले को लेकर समय-समय पर भाजपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच बयानबाजी होती रही है। अब महेंद्र भट्ट के ताजा बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है। आने वाले दिनों में इस मामले पर कांग्रेस और हरक सिंह रावत की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है, इस पर भी राजनीतिक हलकों की नजर रहेगी।




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