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दिल्ली कैंट में आज यूनिटी उत्सव 2.0 का उत्साह, ऊर्जा और जीवंत माहौल के साथ भव्य शुभारंभं हुआ। अपने पहले संस्करण की सफलता को आगे बढ़ाते हुए, यह आयोजन लगातार दूसरे वर्ष आयोजित किया जा रहा है और शुरुआत से ही प्रेरणादायक माहौल बना रहा है।
READ MOREरक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 03 फ़रवरी 2026 को ओडिशा तट के पास चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल प्रदर्शन किया।
READ MOREगणतंत्र दिवस 2026 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति ने भारतीय सेना के अधिकारियों, जूनियर कमीशंड अधिकारियों तथा जवानों को उनकी असाधारण वीरता, उत्कृष्ट नेतृत्व और विशिष्ट सेवा के लिए अनेक प्रतिष्ठित अलंकरण प्रदान करने की स्वीकृति दी है। ये सम्मान विभिन्न सैन्य अभियानों के दौरान प्रदर्शित अदम्य साहस, पेशेवर उत्कृष्टता और राष्ट्र के प्रति निष्ठा के लिए प्रदान किए गए हैं।
READ MOREलेफ्टिनेंट जनरल विकास लखेड़ा के लिए तीन सितारा रैंक शक्ति नहीं, जिम्मेदारी है। असम राइफल्स के डीजी के रूप में उन्होंने सुरक्षा को मानवीय और भरोसेमंद बनाया। आतंकवाद-रोधी अभियानों में उनका नेतृत्व संतुलन, संवाद और विश्वास पर आधारित रहा, जिसने सैनिकों और नागरिकों दोनों का भरोसा जीता।
READ MOREसीडीएस जनरल अनिल चौहान का नेतृत्व शांति, स्पष्ट सोच और दूरदृष्टि पर आधारित है। वे युद्ध को हथियारों से नहीं, बल्कि तकनीक, समन्वय और रणनीति से जीतने में विश्वास रखते हैं। तीनों सेनाओं के एकीकरण के जरिए वे भारत की सैन्य शक्ति को भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।
READ MOREभारत और यूएई की सेनाओं के बीच अल-हमरा में चल रहा ‘डेजर्ट साइक्लोन–II’ अभ्यास शहरी युद्ध प्रशिक्षण पर केंद्रित है। इसमें बिल्डिंग क्लियरेंस, आईईडी अवेयरनेस और संयुक्त आक्रमण अभ्यास शामिल हैं। यह अभ्यास दोनों देशों की सेनाओं के बीच तालमेल और रक्षा सहयोग को मजबूत कर रहा है।
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उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जनपद के मूल निवासी मेजर जनरल नवीन कुमार थपलियाल ने 1 जून 2026 को भारतीय सशस्त्र बलों के प्रतिष्ठित त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान मिलिट्री इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, पुणे के कमांडेंट का कार्यभार संभाल लिया।
READ MOREभारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) अकादमी, मसूरी में रविवार को आयोजित भव्य पासिंग आउट परेड (पीओपी) के साथ 133 युवा अधिकारी औपचारिक रूप से देश की सेवा के लिए आईटीबीपी की मुख्यधारा में शामिल हो गए। इनमें 132 सहायक सेनानी (असिस्टेंट कमांडेंट) और एक महिला उप-सेनानी शामिल हैं। कठिन और चुनौतीपूर्ण प्रशिक्षण पूरा करने के बाद इन युवा अधिकारियों ने राष्ट्र की सीमाओं की सुरक्षा का दायित्व संभालने की दिशा में पहला कदम बढ़ाया।
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