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देश के अन्य हिस्सों की भांति उत्तराखंड भी पेयजल संकट से अछूता नहीं है। फिर चाहे वह पर्वतीय इलाके हों अथवा मैदानी, दोनों ही जगह पानी की किल्लत है। पहाड़ी क्षेत्रों में जलस्रोत सूखने से दिक्कत बढ़ी है तो मैदानी इलाकों में भूजल के अंधाधुंध दोहन से। साफ है कि हम पानी का दोहन तो कर रहे, लेकिन इसे बचाने के बारे में नहीं सोच रहे हैं। यही सबसे बड़ी चिंता का कारण भी है।
READ MOREउत्तराखंड इस समय मौमस की दोहरी मार झेल रहा है। मई महीने में जहां मैदानी इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है तो वहीं उत्तराखंड के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से तापमान काफी गिर गया है। ऐसे में सरकार और प्रशासन को भी मौमस की दौहरी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
READ MOREमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशों पर राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने गर्मी के महीनों के दौरान अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक एडवाइजरी जारी की है।
READ MOREनगर निगम ने रिस्पना नदी किनारे मार्च 2016 के बाद बने 525 अतिक्रमण चिह्नित कर एनजीटी को रिपोर्ट सौंपी थी। एनजीटी ने इन्हें 30 जून तक हटाने के निर्देश दिए थे। कुल 525 में से 89 अतिक्रमण नगर निगम के क्षेत्र में थे बाकी एमडीडीए और नगर पालिका मसूरी क्षेत्र के थे। नगर निगम ने अपने क्षेत्र के अतिक्रमण हटाने के लिए अभियान शुरू किया है।
READ MOREकेदारनाथ धाम के लिए इस बार नौ हेली सेवा प्रदाता कंपनियां तीन सेक्टर सिरसी, गुप्तकाशी व फाटा से नौ हैलीपैड से हेली सेवाएं संचालित कर रही हैं। स्थिति यह है कि प्रतिदिन ढाई सौ के लगभग उड़ानें हो रही हैं। प्रतिवर्ष यात्राकाल में लगभग डेढ़ लाख लोग हेली सेवाओं का उपयोग कर केदारनाथ पहुंचते हैं।
READ MOREउत्तराखंड में और भी अनेक ऐसे परम्परागत कृषि उत्पाद है जो अपने भौगोलिक क्षेत्र विशेष के आधार पर लगातार वैश्विक पहचान बनाते जा रहे है। यह मिर्च स्वाद में अन्य मिर्च प्रजाति से तीखी तो होती है, लेकिन ज्यादा मात्रा में खाने पर शरीर को कोई नुकसान सामान्यतया नहीं पहुंचाती है।
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उत्तराखंड की राजधानी देहरादून की पहचान रही रिस्पना (ऋषिअर्पणा) नदी आज अपने अस्तित्व के सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। कभी स्वच्छ जलधारा के रूप में बहने वाली यह नदी अब प्रदूषण, अतिक्रमण और कचरे के बोझ तले कराहती नजर आ रही है। नदी के किनारों और जलधारा में बड़ी मात्रा में प्लास्टिक, घरेलू कचरा, निर्माण सामग्री और अन्य अपशिष्ट पदार्थों का अंधाधुंध निस्तारण किया जा रहा है, जिससे इसका प्राकृतिक स्वरूप लगातार नष्ट होता जा रहा है।
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उत्तराखंड की पर्यटन नगरी मसूरी में हनीमून मनाने पहुंचे एक नवविवाहित दंपति से जुड़ा मामला इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दिल्ली निवासी 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर पी. राधा गायत्री की मसूरी के धनौल्टी रोड स्थित एक होमस्टे में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।
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