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पांच कमल खिलाने में दिखी सीएम धामी की धमक

लोकसभा की पांचों सीटों पर जीत की हैट्रिक लगाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धमक भी दिखाई दी। चुनाव का एलान होने से पहले से लेकर प्रचार के आखिरी दिन तक समर में जनसभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान में जुटे रहे। उनकी सक्रियता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड में ही उन्होंने 109 से अधिक जनसभाएं कीं।

लोकसभा की पांचों सीटों पर जीत की हैट्रिक लगाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धमक भी दिखाई दी। चुनाव का एलान होने से पहले से लेकर प्रचार के आखिरी दिन तक समर में जनसभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान में जुटे रहे। उनकी सक्रियता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड में ही उन्होंने 109 से अधिक जनसभाएं कीं।

लोकसभा की पांचों सीटों पर जीत की हैट्रिक लगाने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की धमक भी दिखाई दी। चुनाव का एलान होने से पहले से लेकर प्रचार के आखिरी दिन तक समर में जनसभाएं, रोड शो और जनसंपर्क अभियान में जुटे रहे। उनकी सक्रियता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि उत्तराखंड में ही उन्होंने 109 से अधिक जनसभाएं कीं।

मुख्यमंत्री की किरदार में जहां उन्होंने सख्त प्रशासक के तौर पर सख्त कानून बनाने के कड़े फैसले लिए तो राजनेता के तौर पर वह प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के साथ जुगलबंदी करते नजर आए। पार्टी नेतृत्व के साथ संतुलन साधते हुए वह सभी 13 जिलों में बारी-बारी से पहुंचे और चुनावी एलान से पहले उन्होंने महिला वोट बैंक साधने में संगठन की राह को आसान किया। नारी वंदन सम्मेलनों में महिलाएं बड़ी संख्या में जुटी। पार्टी भी मान रही है कि पांचों सीटों पर उसे महिला वोटरों का भरपूर समर्थन मिला।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट कहते हैं, सीएम के नेतृत्व में समान नागरिक संहिता, सख्त नकल विरोधी कानून, सख्त दंगारोधी कानून, जबरन धर्मांतरण रोकने महिलाओं को नौकरियों में 30 फीसदी क्षैतिज आरक्षण देने के लिए जो कानून बनाए गए, पार्टी को चुनाव में उसका भरपूर लाभ मिला। सिर्फ उत्तराखंड में ही नहीं राज्य से बाहर भी धामी सरकार के फैसलों ने छाप छोड़ी।

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Hill Mail

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