उत्तराखंड में 1 लाख 81 हजार प्रवासी ट्रेन, बस या निजी वाहनों से अपने घर लौट चुके हैं। ऐसे में सरकार ने इन सभी को रोजगार देने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। त्रिवेंद्र सिंह सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। प्रदेश में पहले से 83 ग्रोथ सेंटर स्थापित हैं। अब राज्य के विभिन्न स्थानों पर 11 नए ग्रोथ सेंटर को मंजूरी दी गई है।
इनमें पिथौरागढ़ के मुन्स्यारी में पक्षी पर्यटन, चमोली के गैरसैंण में मसाला व देवाल में शहद, नैनीताल के कोटाबाग में शहद और ऑर्गेनिक उत्पाद, रामगढ़ में खाद्य प्रसंस्करण, अल्मोड़ा में नेचुरल फाइबर, ऊधमसिंहनगर के गदरपुर में मसाला, जसपुर में दुग्ध व उच्च गुणवत्ता की रजाई, उत्तरकाशी के रैथल में साहसिक पर्यटन पर आधारित ग्रोथ सेंटर स्थापित किए जाएंगे। इसी प्रकार भीमताल में बेकरी, रामनगर में सोवेनियर, बागजला में ऐंपण के ग्रोथ सेंटर को सैद्धांतिक स्वीकृति दी गई है। इन ग्रोथ सेंटर से युवाओं और स्थानीय लोगों को आजीविका के अवसर मिलेंगे।
ऐसे ही एक फैसले के तहत आराकोट में मंडी परिषद के माध्यम से सेब का सोर्टिंग व ग्रेडिंग सेंटर बनाया जाएगा। इससे प्रदेश के सेब उत्पादकों को अच्छी कीमत मिलेगी।
पढ़ें- उत्तराखंड में कोरोना के बढ़ते केस चुनौती पर कम्युनिटी ट्रांसमिशन नहीं
मुख्य सचिव उत्पल कुमार सिंह बताया कि प्रदेश के सभी जिलों में मनरेगा के काम चल रहे हैं। 18 हजार से अधिक मनरेगा के कार्यों में 2 लाख 44 हजार श्रमिक लगे हैं। 9,760 नए जॉब कार्ड बनाए गए हैं। इनमें से 6,400 को काम भी उपलब्ध कराया गया है।
पढ़ें- पहली जून से कुछ पाबंदियों के साथ ‘अनलॉक’ होगा देश, जानें क्या बदलेगा
राज्य सरकार मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के माध्यम से लोगों को अपना रोजगार शुरू करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। इसके तहत लोन और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है। मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत खुद स्वरोजगार बढ़ाने पर नजर रख रहे हैं। इसकी एक नजीर उस समय देखने को मिली जब अल्मोड़ा के एक शख्स के डेयरी खोलने के लिए बैंकों से लोन दिलाने में मदद की अपील करते सीएम रावत को ट्वीट किया। 2 मिनट से भी कम समय में सीएम ने ट्वीट का जवाब देते हुए जिलाधाकिरी अल्मोड़ा को आवश्यक कार्यवाही के लिए आदेशित किया।


Pls explain the 83 govt schemes to empower people of uttrakhand by uk govt. And concerned department and eligibility