Friday , 4 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे डीएम डॉ आशीष चौहान, बोले जब तक बाघ पिंजरे में कैद नहीं हो जाता तब तक सावधानी बरतें
उत्तराखंड न्यूज़ताज़ा ख़बरपौड़ी गढ़वाल

प्रभावित परिवारों से मिलने पहुंचे डीएम डॉ आशीष चौहान, बोले जब तक बाघ पिंजरे में कैद नहीं हो जाता तब तक सावधानी बरतें

बाघ को पकड़ने के लिए डल्ला गांव में 2 ट्रेंक्यूलाइजर टीमों की तैनाती की जा चुकी है जबकि सिमली के ग्रामीणों की सुरक्षा के दृष्टिगत जिलाधिकारी ने डीएफओ लैंसडौन की अगुवाई में पृथक से एक ट्रेंक्यूलाइजर टीम तैयार करने के निर्देश दिए है। जिलाधिकारी ने कहा कि क्षेत्रवासियों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता में है इसलिए बाघों को पकड़ने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिलाधिकारी ने सिमली में बाघ को पकड़ने के लिए आज ही पिंजरा लगाने के निर्देश दिए हैं।

सिमली के ग्रामीणों ने कहा कि बाघ वयस्क है और काफी तंदरुस्त भी है। जबकि इसके उलट डल्ला गांव में लगाए गए ट्रैक कैमरों में बाघ के दो शावक दिखाई दे रहे है जो कि शिकार करने में अनुभवहीन दिखाई दे रहे है। जिलाधिकारी ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गांव के आसपास कितने बाघ हैं, इसकी ठोस मॉनिटरिंग करते हुए सटीक जानकारी उपलब्ध कराएं। उन्होंने स्पष्ट किया जब तक बाघ को पकड़ा नहीं जाता है तब तक गांवों में फॉरेस्ट विभाग के माध्यम से निरंतर गश्त कराई जाए और किसी भी प्रकार का इनपुट मिलने पर इसकी जानकारी तत्काल देना सुनिश्चित करें।

जिलाधिकारी ने ग्रामीणों से धारा 144 का अनुपालन करने की अपील की साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्रामीणों के पशुओं के लिए चारापत्ती, उनके स्वास्थ्य की देखभाल व खाद्यान्न इत्यादि की आपूर्ति करवाना सुनिश्चित करें। उन्होंने ग्रामीणों को कहा कि डल्ला गांव की तरह ही सिमली गांव में भी ट्रांक्यूलाइजर टीम तैनात की जाएगी। कहा की बाघ को पिंजरे में कैद करने के लिए पूरी तैयारी की गई है। जिलाधिकारी ने ग्रामीणों को कहा की जब तक बाघ पिंजरे में कैद नहीं हो जाता तब तक गांव में सावधानी के साथ रहें। बाघ के हमले पर अलग-अलग दो स्थानों पर हुई 2 वृद्ध व्यक्तियों की मृत्यु होने पर वन विभाग, पुलिस व अन्य विभागों के अधिकारी बाघ को पिंजरे में कैद करने के लिए गांव में डटे हैं।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...