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डॉ. मनमोहन सिंह चौहान ने किया तीन-दिवसीय प्रोग्रेसिव हार्टिकल्चर कॉनक्लेव का शुभारम्भ

डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि फल एवं सब्जी के गुणवत्तायुक्त उत्पादन से समाज में 20 प्रतिषत कुपोषण को दूर किया जा सकता है। उन्होंने हिमाचल की भांति उत्तराखंड में भी गुणवत्तायुक्त सेब के उत्पादन हेतु वैज्ञानिकों का आह्वान किया एवं शीत श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने सामान्य शोध से इतर परिवर्तनात्मक शोध पर बल दिया।

पंतनगर विश्वविद्यालय के उद्यान विज्ञान विभाग एवं भारतीय औद्यानिकी अनुसंधान एवं विकास समिति (आई.एस.एच.आर.डी.), उत्तराखंड के संयुक्त तत्वाधान में तीन-दिवसीय प्रोग्रेसिव हार्टिकल्चर कॉनक्लेव 2023 का शुभारम्भ रतन सिंह सभागार में विश्वविद्यालय के कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान द्वारा किया गया। इस अवसर पर असम कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. बी.सी. डेका एवं डा. वाई.एस.आर. हॉर्टिकल्चर विश्वविद्यालय, आन्ध्र प्रदेश के कुलपति, डा. टी. जानकीराम मुख्य अतिथि थे।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि फल एवं सब्जी के गुणवत्तायुक्त उत्पादन से समाज में 20 प्रतिषत कुपोषण को दूर किया जा सकता है। उन्होंने हिमाचल की भांति उत्तराखंड में भी गुणवत्तायुक्त सेब के उत्पादन हेतु वैज्ञानिकों का आह्वान किया एवं शीत श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया। उन्होंने सामान्य शोध से इतर परिवर्तनात्मक शोध पर बल दिया। इस अवसर पर सोसायटी की तरफ से औद्यानिकी के क्षेत्र में विषिष्ट कार्य करने के लिए कई वैज्ञानिकों को पुरस्कृत किया गया।

सोसायटी के अध्यक्ष एवं प्रसिद्ध उद्यान वैज्ञानिक डा. आर.के. पाठक ने समय की आवश्यकता को देखते हुए जैविक कृषि आधारित शोध करने पर बल दिया। कार्यक्रम समन्वयक एवं कॉनक्लेव के मुख्य आयोजक, डा. एस.के. द्विवेदी ने अपने स्वागत समारोह में उद्यान विज्ञान के तकनीक रूपान्तरण पर जोर दिया, ताकि किसानों को ऐसी तकनीक से गुणवत्तायुक्त उत्पादन मिल सके।

विश्वविद्यालय के निदेशक शोध, डा. ए.एस. नैन द्वारा उद्यान की महत्ता को देखते हुए विभिन्न आयाम एवं पहाड़ी क्षेत्रों की भोगोलिक परिस्थिति के अनुसार कार्य करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। इस अवसर पर अधिष्ठाता कृषि महाविद्यालय डा. शिवेन्द्र कुमार कष्यप द्वारा औद्यानिक तकनीकों को किसान के प्रक्षेत्रों तक वास्तविक रूप में पहुंचाने पर जोर दिया गया।

अन्त में आयोजन समिति के सचिव डा. रंजन श्रीवास्तव द्वारा धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त अधिष्ठाता, निदेशक, विभागाध्यक्ष, संकाय सदस्य एवं आमंत्रित वैज्ञानिक एवं शोधार्थी उपस्थित थे।

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