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दुधाटोली शिवालिक हिमालय का सबसे ऊंचा पर्वत

उत्तराखंड को ऐसे ही स्वर्ग नहीं कहा जाता है प्रकृति ने यहां ऐसे ऐसे खूबसूरत जगहों को बनाया है जिसे देखकर मन भावविभोर हो जाता है। ऐसी ही एक जगह है धुधातोली... जो कि 275 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है। दुधाटोली शिवालिक हिमालय का सबसे ऊंचा पर्वत है। लोग इसे ‘उत्तराखंड का पामीर’ मानते हैं।

गर्मियों के समय में हजारों से अधिक पशु चारा और पानी के लिए अपने शीर्ष पर ले जाते हैं, इसलिए इसका नाम ‘दूध का कौल्ड्रन’ रखा गया है। इस जगह की मोटी और विविध वनस्पतियों और जीवों ने हमेशा हमें आश्चर्यचकित किया है।
दुधातोली प्रमुख गैर ग्लेशियल नदियों अतागाड, बिनो, पूर्वी नायर, पश्चिम नायर और पश्चिम रामगंगा में से पांच का उद्गम स्थल है।

दुधातोली और उसके आसपास की तलहटी रीपरियन क्षेत्रों का एक जटिल नेटवर्क बनाती है और राज्य में सबसे बड़े शीतकालीन ब्रॉडलीफ और शंकु जंगलों में से एक का घर है। पश्चिम हिमालयन फिर, स्प्रूस, देवदार, पाइन, मेपल, चेस्टनट, हॉर्नबीम, एल्डर, हेजलनट आदि।
इसके अलावा यहां कई औषधीय जड़ी बूटियां, झाड़ू और जंगली फल पाए जाते हैं, जिनमें से जंगली ओरेगनो, थाइम, गलंगल, बर्बेरिस, रास्पबेरी, गूजबेरी, गुलाब हिप, हिमालयन स्ट्रॉबेरी ट्री, रेडकुरेंट और ब्लैककुरेंट नोट किया जाना है।

हालांकि, शीर्ष की ऊंचाई लगभग 3600 मीटर है, बाएं में पार्वती घाटी की हिमालयन रेंज को बाएं में अपी नाम्बा तक ले आता है। यहां श्री वीर चंद्र सिंह गढ़वाली और बाबा मोहन उत्तराखंडी का स्मारक है।
यहां क्या नहीं है…. यहां शांति के बीच बिंदेश्वर महादेव का सुंदर मंदिर परिसर है। पहाड़ियों को घुमाने के लिए मीडोज… गुफाओं से घाटी तक…. बर्फ से ढकी हुई पहाड़ी दृश्य…. जंगली बिल्लियों से खरगोश और शायद बेहिसाब पक्षियों की संख्या…. और इन पहाड़ों को वर्जिन और शांत रखने की उम्मीद आज के समय में आने के लिए भी।
साभार – धीरज गब्र्याल

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