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मलबा और पत्थर जमा होने से गंगोत्री में गंगा ने घाटों से किया किनारा

गंगोत्री धाम में बने मां गंगा के कपाट 30 अप्रैल को खोलने के साथ ही चारधाम यात्रा का शुभारंभ होने जा रहा है। जिसके लिए शासन-प्रशासन जोरशोर से तैयारियां कर रहा है।  किन्तु इस बार भक्त जनों और श्रद्धालुओं को स्नान और आचमन के लिए मंदिर और घाटों से थोड़ा दूर जाना पड़ेगा, क्योंकि मानसून काल में आये मलबे के कारण मां गंगा की अविरल धारा मंदिर के घाटों से दूर जा चुकी है।

हालांकि मंदिर समिति और तीर्थ पुरोहितों का कहना है की गंगा की धारा को मंदिर की ओर लाने के प्रयास किये जा रहे हैं। यहं जेसीबी के जरिए मलवा और पत्थरों को हटाकर धारा का प्रवाह मंदिर की ओर मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। घाटों से गंगा के विरत होने से घाटों पर स्नान के दौरान जो सुरक्षा प्रबंध होते थे अब वह भी नहीं रह गए हैं। घाटों पर सीढ़ी और चौन आदि की व्यवस्था होती थी लेकिन अब सुरक्षा व्यवस्था के बिना स्नान करना मजबूरी होगा जिसके कारण दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहेगा। अच्छा होता कि शासन प्रशासन समय से घाटों की साफ सफाई और मरम्मत का काम करके गंगा की धारा को घाटों तक ला पाता और श्रद्धालुओं को कोई परेशानी नहीं होती।

भले ही गंगोत्री मंदिर और घाटों से दूर चले जाने के कारण श्रद्धालुओं को स्नान और आचमन में होने वाली परेशानी से कोई शिकवा शिकायत न हो लेकिन गंगोत्री मंदिर और धाम की प्राकृतिक सुंदरता को इससे नुकसान जरूर हो रहा है। बीते साल मानसूनी सीजन में आए मलवे और बोल्डरों का जो ढेर मंदिर के घाटों के सामने जमा हो चुका है उसके कारण अब गंगा की धारा मंदिर से दूर जा चुकी है। जब यह धारा मंदिर की सीढ़िया और घाटों की सीढ़ियों को छूकर जाती थी तो एक मनोहारी वातावरण पैदा होता था जिसका अब यहां अभाव दिखेगा।

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Hill Mail

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