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चारधाम की कई परियोजनाओं के लिए अब नहीं होगी पर्यावरण की मंजूरी की जरूरत

केंद्र सरकार ने पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन संबंधी नियमों में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत नियंत्रण रेखा, सीमा के 100 किलोमीटर के भीतर राजमार्ग परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी से छूट मिली है। संवेदनशील क्षेत्र केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री की कनेक्टिविटी में सुधार के लिए 899 किलोमीटर सड़कों को चौड़ा करने की बाधा भी अब दूर हो जायेगी।

केंद्र ने पर्यावरणीय प्रभाव के आकलन संबंधी नियमों में संशोधन किया है। इस संशोधन के तहत नियंत्रण रेखा या सीमा के 100 किलोमीटर के भीतर रक्षा तथा सामरिक महत्व से संबंधित राजमार्ग परियोजनाओं को पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता से छूट देने की घोषणा की। केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, हवाई अड्डों पर टर्मिनल भवनों के विस्तार (हवाई अड्डे के मौजूदा क्षेत्र में विस्तार के बिना) से संबंधित परियोजनाओं के लिए अब अनुमति लेने की जरूरत नहीं होगी। संवेदनशील क्षेत्र केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री की कनेक्टिविटी में सुधार के लिए 899 किलोमीटर सड़कों को चौड़ा करने की बाधा भी अब दूर हो जायेगी।

चारधाम परियोजना के लिए नहीं होगी पर्यावरण की मंजूरी की जरूरत

अधिसूचना के अनुसार, ‘सीमावर्ती राज्यों में रक्षा और सामरिक महत्व से संबंधित राजमार्ग परियोजनाएं प्रकृति के लिहाज से संवेदनशील हैं और कई मामलों में रणनीतिक, रक्षा तथा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्राथमिकता के आधार पर अनुमति लेने से छूट दी जाती है।’ इसमें कहा गया कि नियंत्रण रेखा या सीमा के 100 किलोमीटर के भीतर सभी राजमार्ग परियोजनाओं को छूट दी जाएगी। गौरतलब है कि पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने सीमा परियोजनाओं को पर्यावरण मंजूरी से छूट देने के लिए अप्रैल में पेश किए गए मसौदे का विरोध करते हुए कहा था कि इससे पर्यावरण को नुकसान होगा। संशोधित नीति लागू होने के बाद उत्तराखंड में चारधाम परियोजना के कुछ हिस्से, हिमालय तथा पूर्वोत्तर की ऐसी कई परियोजनाओं के लिए पर्यावरण मंजूरी की जरूरत नहीं होगी जो नियंत्रण रेखा या सीमा के 100 किलोमीटर के भीतर हैं।

कुछ समय पहले नरेंद्र मोदी सरकार की चारधाम परियोजना को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी मिल गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने ऑल वेदर राजमार्ग परियोजना में सड़क की चौड़ाई बढ़ाने की इजाजत दे दी थी और इसके साथ ही डबल लेन हाइवे बनाने का रास्ता साफ हो गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि अदालत न्यायिक समीक्षा में सेना के सुरक्षा संसाधनों को तय नहीं कर सकती। हाइवे के लिए सड़क की चौड़ाई बढ़ाने में रक्षा मंत्रालय की कोई दुर्भावना नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाल के दिनों में सीमाओं पर सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां सामने आई है। यह अदालत सशस्त्र बलों की ढांचागत जरूरतों का दूसरा अनुमान नहीं लगा सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सामरिक महत्व के राजमार्गों के साथ अन्य पहाड़ी इलाकों के समान व्यवहार नहीं किया जा सकता है। वे राष्ट्र की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। पर्यावरणीय मुद्दों के रखरखाव के लिए निरंतर निगरानी की भी आवश्यकता है। जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि हम नहीं चाहते कि भारतीय सैनिक 1962 के हालात में हों लेकिन रक्षा और पर्यावरण दोनों की जरूरतें संतुलित होनी चाहिए। वहीं केंद्र ने सड़क चौड़ी करने की मांग करते हुए कहा था कि चीन द्वारा दूसरी तरफ जबरदस्त निर्माण किया जा रहा है। चीन दूसरी तरफ हेलीपैड और इमारतें बना रहा है। टैंक, रॉकेट लांचर और तोप ले जाने वाले ट्रकों को इन सड़कों से गुजरना पड़ सकता है इसलिए रक्षा की दृष्टि से सड़क की चौड़ाई दस मीटर की जानी चाहिए। जिससे कि समय पड़ने पर यहां पर सुरक्षा के साजोसामान को जल्दी से पहुंचाया जा सके और हमारी सेना दुश्मनों का मुकाबला करने में किसी तरह से पीछे न रहे।

अब चीन डोकलाम में अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। वह आए दिन सीमा पर कुछ ना कुछ करता रहता है। एक बार फिर डोकलाम में चीनी घुसपैठ का पर्दाफाश हुआ है। चीन के घुसपैठ का मामला इस बार अरुणाचल-भूटान बॉर्डर से सामने आया है। बीते दिनों चीनी घुसपैठ के बाद चीन की तरफ से गांव बसाने की जानकारी सामने आई थी। अब भूटान की ओर डोकलाम पहाड़ी के पूर्व में चीन के एक गांव का निर्माण करने की नई उपग्रह तस्वीरें को सामने आई हैं। नई सैटेलाइट तस्वीरों में हर घर के दरवाजे पर कारें खड़ी नजर आ रही है। इन फोटो से साफ हो गया है कि चीन ने भारत की सीमा से सटे डोकलाम के पास दो गांवों को पूरी तरह से बसा लिया है।

अमेरिकी कंपनी मेक्सर द्वारा खींची गई तस्वीरों को साझा किया गया है। मेक्सर अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में खुफिया मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करती है। नई सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिलता है कि चीन अमो चू नदी घाटी में एक दूसरा गांव भी बसा रहा है। चीन ने दक्षिण क्षेत्र में तीसरे गांव या आवास निर्माण शुरू कर दिया है। तीसरे गांव के लिए अमो चू के पार एक पुल तैयार किया गया है। अमो चू नदी के किनारे भूटानी क्षेत्र में 10 किलोमीटर अंदर कम से कम चार गांवों को बसाया है। यह क्षेत्र भूटान की तेज बहाव वाली अमो चू नदी के किनारे है। सैटेलाइट तस्वीरों में गांव के सभी घरों के सामने पार्किंग दी गई है। इनमें देख सकते है कि हर घर के दरवाजे के बाहर एक गाड़ी खड़ी नजर आ रही है। इन्हें आधुनिक तकनीकों से लैस किया गया है।

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