घटना श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र के पैठाणी इलाके के खंड मल्ला गांव की है। गांव निवासी 33 वर्षीय सरोप सिंह बृहस्पतिवार शाम रोजाना की तरह अपने मवेशियों को चराने के लिए घर के निकट जंगल की ओर गए थे। मौसम सामान्य था और आसपास का क्षेत्र शांत था, लेकिन इसी दौरान झाड़ियों में छिपा एक भालू अचानक बाहर निकल आया और उसने सरोप सिंह पर हमला कर दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्रामीणों के अनुसार हमला इतना अचानक था कि युवक को संभलने का मौका तक नहीं मिला। भालू ने उन पर झपट्टा मारते हुए गंभीर हमला किया। जानलेवा स्थिति को देखते हुए सरोप सिंह ने असाधारण साहस दिखाया और आत्मरक्षा के लिए भालू के दोनों जबड़ों को मजबूती से पकड़ लिया। कुछ समय तक दोनों के बीच संघर्ष चलता रहा। इस दौरान भालू लगातार हमला करने की कोशिश करता रहा, जबकि युवक अपनी जान बचाने के लिए संघर्ष करता रहा।
संघर्ष के दौरान सरोप सिंह के सिर और हाथों में गंभीर चोटें आईं। उनके शरीर पर कई स्थानों पर गहरे घाव भी हो गए। इसी बीच उनकी चीख-पुकार और शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों ने जोर-जोर से हल्ला मचाया, जिसके बाद भालू वहां से जंगल की ओर भाग गया। ग्रामीणों ने तत्काल घायल युवक को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और बिना देर किए अस्पताल ले गए।
गंभीर रूप से घायल सरोप सिंह को राजकीय मेडिकल कॉलेज श्रीनगर के बेस अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल पहुंचते ही चिकित्सकों ने उनका प्राथमिक उपचार शुरू किया। सर्जरी विभाग की टीम ने उनकी स्थिति का आकलन कर आवश्यक चिकित्सकीय उपचार और सर्जिकल प्रक्रियाएं पूरी कीं। चिकित्सकों के अनुसार मरीज को कई गंभीर चोटें आई हैं, लेकिन समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण उनकी स्थिति नियंत्रण में है और फिलहाल वे खतरे से बाहर हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि भालू के हमले से बने घावों में संक्रमण का खतरा रहता है, इसलिए मरीज को लगातार निगरानी में रखा गया है। चिकित्सा टीम उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक उपचार जारी है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार घायल युवक का स्वास्थ्य धीरे-धीरे बेहतर हो रहा है।
यह घटना एक बार फिर पहाड़ी क्षेत्रों में मानव-वन्यजीव संघर्ष की बढ़ती समस्या को उजागर करती है। जंगलों के आसपास बसे गांवों में अक्सर भालू, गुलदार और अन्य वन्यजीवों के आने की घटनाएं सामने आती रहती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में भोजन और प्राकृतिक आवास की कमी के कारण वन्यजीव आबादी वाले क्षेत्रों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे ऐसी घटनाओं में वृद्धि हो रही है।
स्थानीय लोगों ने वन विभाग से क्षेत्र में गश्त बढ़ाने और वन्यजीवों की गतिविधियों पर निगरानी रखने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि शाम और सुबह के समय जंगल के आसपास जाने वाले लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए। साथ ही वन विभाग को संवेदनशील क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सुरक्षा उपायों की जानकारी देनी चाहिए।
सरोप सिंह की बहादुरी आज पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। जीवन और मृत्यु के बीच चले इस संघर्ष में उन्होंने जिस साहस और धैर्य का परिचय दिया, वह न केवल प्रेरणादायक है बल्कि विषम परिस्थितियों में मानसिक दृढ़ता का भी उत्कृष्ट उदाहरण है।


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