इसके उपरान्त, प्रधानमंत्री ने गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर 500 करोड़ रुपये की लागत की गोरखपुर रेलवे स्टेशन पुनर्विकास की परियोजना का शिलान्यास किया। उन्होंने गोरखपुर से लखनऊ एवं जोधपुर से अहमदाबाद हेतु वन्दे भारत ट्रेनों को हरी झण्डी दिखाकर रवाना किया। प्रधानमंत्री ने गोरखपुर से लखनऊ वन्दे भारत ट्रेन में बच्चों से संवाद किया तथा स्टाफ को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने इंजन का निरीक्षण भी किया। प्रधानमंत्री ने केन्द्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी के हासूपुर स्थित आवास पहुंचकर उनसे भेंट की।

गीता प्रेस शताब्दी समारोह के समापन कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि गुरु गोरक्षनाथ जी की तपोस्थली और अनेक संतां की साधना स्थली गीता प्रेस में संतों का आशीर्वाद फलीभूत होता है। उनका गोरखपुर आना ‘विकास भी विरासत भी’ की नीति का एक अद्भुत उदाहरण है। जहां आज एक ओर उन्हें चित्रमय शिवपुराण एवं नेपाली भाषा में शिवपुराण पुस्तक के विमोचन का सौभाग्य मिला, वहीं दूसरी ओर गोरखपुर रेलवे स्टेशन के आधुनिकीकरण का कार्य भी शुरू होने जा रहा है। गोरखपुर से लखनऊ एवं जोधपुर से अहमदाबाद के बीच चलने वाली वंदेभारत एक्सप्रेस को भी रवाना किया जाएगा। वंदेभारत ट्रेन ने देश के माध्यम वर्ग के लोगों की सुविधाओं को एक नई उड़ान दी है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता प्रेस विश्व का एक ऐसा एकमात्र प्रिण्टिंग प्रेस है, जो सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक जीवन्त आस्था है। गीता प्रेस का कार्यालय करोड़ों लोगों के लिए किसी भी मन्दिर से कम नहीं है। इसके नाम में भी गीता है और इसके काम में भी गीता है। जहां पर गीता है, वहां पर साक्षात कृष्ण हैं और जहां पर कृष्ण हैं, वहां पर करुणा, कर्म भी है। वहां ज्ञान का बोध भी है और विज्ञान का शोध भी है। क्योंकि गीता का वाक्य है ‘वासुदेवः सर्वम्’ अर्थात सब कुछ वासुदेव में है सब कुछ वासुदेव से ही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1923 में गीता प्रेस के रूप में जो आध्यात्मिक ज्योति प्रज्ज्वलित हुई, आज उसका प्रकाश पूरी मानवता का मार्गदर्शन कर रहा है। हमारा सौभाग्य है कि आज हम सभी इस मानवीय मिशन के शताब्दी वर्ष के साक्षी बन रहे हैं। इस ऐतिहासिक अवसर पर केन्द्र सरकार ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार भी दिया है। गांधी जी का गीता प्रेस से भावानात्मक जुड़ाव था। एक समय में गांधी जी ‘कल्याण’ के माध्यम से गीता प्रेस के लिए लिखा करते थे। गांधी जी ने सुझाव दिया था कि ‘कल्याण’ पत्रिका में विज्ञापन न छापे जाएं। गीता प्रेस, गांधी जी के उस सुझाव का शत-प्रतिशत अनुसरण कर रही है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जो गांधी शांति पुरस्कार गीता प्रेस को मिला है, यह देश की ओर से गीता प्रेस का सम्मान है। यह पुरस्कार गीता प्रेस के योगदान और इसके 100 वर्षों की विरासत का सम्मान है। इन 100 वर्षों में गीता प्रेस द्वारा करोड़ों किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। यह संख्या किसी को भी हैरान कर सकती है। यह पुस्तकें लागत से भी कम मूल्य पर बिकती हैं तथा घर-घर पहुंचाई जाती है। इस विद्या प्रवाह से कितने लोगों को आध्यात्मिक-बौद्धिक तृप्ति दी होगी, समाज के लिए कितने समर्पित नागरिकों का निर्माण किया होगा। उन्होंने उन विभूतियों का अभिनन्दन किया, जो इस यज्ञ में निष्काम भाव से बिना किसी प्रचार के अपना सहयोग देते रहे हैं। उन्होंने इस अवसर पर गीता प्रेस के संस्थापक सेठजी जयदयाल गोयन्दका तथा ‘कल्याण’ पत्रिका के जीवनपर्यन्त सम्पादक रहे भाईजी हनुमान प्रसाद पोद्दार को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि गीता प्रेस जैसी संस्था, सिर्फ धर्म व कर्म से नहीं जुड़ी है, बल्कि इसका एक राष्ट्रीय चरित्र भी है। गीता प्रेस भारत को जोड़ती है तथा भारत की एकजुटता को सशक्त करती है। देश भर में इसकी 20 शाखाएं हैं। देश के हर कोने में रेलवे स्टेशनों पर हमें गीता प्रेस का स्टॉल देखने को मिलता है। 15 अलग-अलग भाषाओं में यहां से करीब 1,600 प्रकाशन होते हैं। गीता प्रेस अलग-अलग भाषाओं में भारत के मूल चिन्तन को जन-जन तक पहुंचाती है। गीता प्रेस एक तरह से ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को प्रतिनिधित्व देती है। गीता प्रेस ने अपने 100 वर्षां की यह यात्रा एक ऐसे समय में पूरी की है, जब देश अपनी आजादी का 75वां वर्ष मना रहा है। इस तरह के योग केवल संयोग नहीं होते।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गीता प्रेस के शताब्दी समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का प्रदेश की जनता एवं शासन की ओर से स्वागत करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री देश के महान सपूत एवं नये भारत के निर्माता हैं। उन्होंने देश को वैश्विक पहचान दिलायी है। विगत 09 वर्षां में हम सभी ने देश के विकास की एक नयी यात्रा के साथ-साथ आस्था व विरासत को मिल रहे सम्मान तथा वैश्विक स्तर पर भारत को मिल रही पहचान को देखा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नये भारत में समग्र भारत के विकास की अवधारणा चरित्रार्थ होती हुई दिखाई दे रही है। आज देश की गौरवशाली आस्था व विरासत को एक नई पहचान मिली है। योग भारत की अति प्राचीन विधा रही है, लेकिन योग को पहली बार वैश्विक पहचान प्राप्त हुई, जब प्रत्येक वर्ष 21 जून की तिथि को अन्तरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाने के प्रधानमंत्री जी के प्रस्ताव को संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा मान्यता प्राप्त हुई। वर्तमान में 180 देश भारत की ऋषि परम्परा के इस प्रसाद और उपहार के साथ जुड़कर देश के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित कर रहे हैं। कुम्भ को विश्व की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर के रूप में मान्यता देकर प्रयागराज कुम्भ को वैश्विक मान्यता दिलाने का कार्य वर्ष 2019 में हुआ, जिसे देश और दुनिया ने देखा।
गीता प्रेस बोर्ड को शताब्दी अवसर पर बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि गीता प्रेस जुड़े ट्रस्टी साहित्य के माध्यम से सनातन धर्म की आवाज को जन-जन तक पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अपने संस्थापकों की भावना के अनुरूप इस प्रेस ने अपनी 100 वर्ष की यात्रा को जिस प्रकार शानदार तरीके से आगे बढ़ाया है, भविष्य में भी उसी प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ाने का कार्य करेगा।


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