उत्तराखंड में चमोली जिले का सीमांत घेस क्षेत्र एक बार फिर चर्चा में है। इस दूरस्थ क्षेत्र के युवाओं ने अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए सेना भर्ती की कड़ी बाधाओं को पार कर बड़ी सफलता अर्जित की है। शनिवार और रविवार को आए लिखित परीक्षा के परिणाम के बाद घेस घाटी के 11 युवक सेना की विभिन्न शाखाओं में सेवाएं देने के लिए चयनित हुए हैं।
इन 11 युवकों में से आठ ग्राम सभा घेस के ही हैं, जबकि दो युवक हिमनी और एक पिनाऊं गांव से है। कड़ी शारीरिक परीक्षा और मेडिकल के बाद इन युवाओं को लिखित परीक्षा के लिए चुना गया था। क्षेत्र के लिए गर्व की बात यह है कि शिक्षा के क्षेत्र में बहुत ही पिछड़ा होने के बावजूद इस गांव के सभी बच्चों ने लिखित परीक्षा में सफलता पाई है।
सफलता पाने वालों में दो बच्चे स्पोर्ट्स कोटे में चुने गए हैं। चुने गए युवक हैं-
1. रवि बिष्ट पुत्र मोहन सिंह बिष्ट ( बॉलिबाल)
2. देवेंद्र सिंह पुत्र कुंदन सिंह बिष्ट (बॉक्सिंग)
3. नीरज सिंह पुत्र लक्ष्मण सिंह बिष्ट (जीडी)
4. चंदन सिंह पुत्र गोविंद सिंह बिष्ट (जीडी)
5. भगत सिंह पुत्र नारायण सिंह बिष्ट (जीडी)
6. कमल सिंह पुत्र धन सिंह बिष्ट (जीडी)
7. कमल सिंह पुत्र गोविंद सिंह (जीडी)
8. बाबी बिष्ट पुत्र प्रताप सिंह (जीडी)
(ये सभी ग्राम सभा घेस से हैं)
9. धर्मेंद्र पुत्र सुबेदार खिलाफ सिंह दानू (जीडी) (पिनाऊं)
10. नंदन सिंह पुत्र राजेन्द्र सिंह दानू (जीडी) (हिमनी)
11. अनिल पुत्र कुंदन सिंह दानू (जीडी) (हिमनी)
कुछ माह पहले हिमनी गांव के दो युवकों का चयन आईटीबीपी में हुआ था। सैन्य बलों के माध्यम से देश सेवा का अवसर पाने वाले सभी चयनित युवकों को उनके घर-परिवार और प्रदेश के लोगों ने शुभकामनाएं और बधाई दी हैं।
अच्छी बात यह है अधिकतर युवा किसी न किसी रूप में सैन्य पृष्ठभूमि से जुड़े हैं और वे एक सैनिक के धर्म, अनुशासन व कर्तव्य जैसी बुनियादी बातों को अपने घर से ही समझते हैं। घेस क्षेत्र यद्यपि दूरस्थ होने के कारण विकास से वंचित रहा है। बावजूद इसके क्षेत्र के लोगों ने सेना के साथ ही जहां भी उन्हें अवसर मिला, अपनी मेहनत के बल पर प्रतिभा दिखाने में पीछे नहीं रहे।
इस कड़ी में पहला नाम मेजर देव सिंह दानू (पिनाऊं) का है, जिन्होंने इस क्षेत्र को बड़ा सम्मान दिलाया। गढ़वाल राइफल के सूबेदार मेजर देव सिंह दानू नौकरी छोड़कर आजाद हिंद फौज में नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अंगरक्षक बटालियन के सीओ रहे और उन्हें मेजर का रैंक दिया गया। वीर चक्र विजेता राइफलमैन जमन सिंह दानू (बलाण) ने अपने सैन्य कर्तव्य के निवर्हन के लिए वीर गति पाई थी तो स्व. कैप्टन बहादुर सिंह पटाकी (हिमनी वाले) नगा रेजिमेंट से क्षेत्र के पहले ऑनरेरी कैप्टन बने।
पिनाऊं निवासी सूबेदार मेजर आलम सिंह दानू का योगदान भी यादगार है। फर्स्ट गढ़वाल (बाद में सिक्स मैकेनाइज्ड) के सूबेदार खड़क सिंह बिष्ट पहले ऑनरेरी सूबेदार मेजर बने। इसके साथ ही 13वीं गढ़वाल के सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन केशर सिंह बिष्ट जो रेजिमेंट के बेस्ट जेसीओ माने जाते थे, को दो बार भारतीय सैन्य अकादमी में प्रशिक्षक रहने का सौभाग्य मिला।
हिमनी निवासी सूबेदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन हरचंद सिंह दानू भी 11वीं गढ़वाल के सूबेदार मेजर रहे। असम राइफल में 12 साल तक सूबेदार मेजर रहे बलवंत सिंह पटाकी व 23 असम के वर्तमान सूबेदार मेजर जय सिंह दानू, सेंटर बैंड से सूबेदार मेजर गोपाल सिंह बिष्ट को दर्जनों बार रिपब्लिक डे परेड में अपनी टुकड़ी का नेतृत्व करने के साथ ही भूटान आर्मी के बैंड प्रशिक्षक के रूप में नियुक्ति पाने का गौरव मिला।
उनके छोटे भाई सिग्नल रेजिमेंट में तैनात सूबेदार मेजर सोबन सिंह बिष्ट और एवरेस्टर सूबेदार मेजर हीरा सिंह दानू 19 गढ़वाल राइफल्स में तैनात हैं। इसी कड़ी में 12वीं गढ़वाल के दो सीनियर जेसीओ सूबेदार खिलाफ सिंह दानू (पिनाऊं) और सुबेदार लक्ष्मण सिंह बिष्ट (घेस) नई पीढ़ी के वो होनहार फौजी हैं, जो अपने सैन्य कैरियर के शिखर यानि सुबेदार मेजर के पद पर पहुंच रहे हैं। इन दोनों को ही अगले कुछ माह के भीतर सुबेदार मेजर की जिम्मेदारी मिलनी तय है।
साफ है कि दूरस्थ क्षेत्र के लोग शिक्षा के अभाव के बावजूद सफलता की सीढ़ियां चढ़ने में पीछे नहीं रहे। नई पीढ़ी के सैनिक अपने इन अग्रजों का अनुसरण करते हुए इस क्षेत्र की सैन्य परंपरा को और अधिक गौरवान्वित करेंगे।
(स्रोत- अर्जुन सिंह)


घेस सीमांत क्षेत्र (चमोली) ने अपनी राष्ट्र समर्पण की ललक को पुनः उजागर कर सम्पूर्ण उत्तराखंड में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर ली है।बधाई। इस सुदूर क्षेत्र के निवासियों ने भारतीय सशस्त्र सेनाओं – विशेषकर गढ़वाल राइफल्स में उल्लेखनीय सेवाऐं देकर बहुत कीर्तिमान बनाए हैं।