Monday , 14 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों का बदला समय, पढ़ाई का समय एक घंटा बढ़ा
उत्तराखंड न्यूज़देहरादूनसरोकार

उत्तराखंड में सरकारी स्कूलों का बदला समय, पढ़ाई का समय एक घंटा बढ़ा

उत्तराखंड सरकार ने सरकारी स्कूलों के लिए नई समय-सारिणी लागू कर दी है, जिसमें पढ़ाई का समय बढ़ाया गया है।

नई व्यवस्था के अनुसार, अब अप्रैल से सितंबर तक स्कूल सुबह 7:45 बजे खुलेंगे और दोपहर 2:05 बजे छुट्टी होगी। इस बदलाव के साथ छात्रों की पढ़ाई का समय लगभग एक घंटे तक बढ़ा दिया गया है।

सर्दियों में स्कूल सुबह 8:50 बजे से शुरू होंगे और दोपहर 3:10 बजे तक संचालित होंगे। नई समय-सारिणी में कुल स्कूल समय 6 घंटे 20 मिनट निर्धारित किया गया है।

गर्मियों में पहले स्कूल लगभग सवा पांच घंटे चलते थे, जिसे अब बढ़ाकर छह घंटे से अधिक कर दिया गया है। वर्ष 2018 से लागू समय-सारिणी में बदलाव करते हुए यह नया निर्णय लिया गया है।

नई व्यवस्था में प्रत्येक पीरियड अब 40 मिनट का होगा। पहले अलग-अलग विषयों के लिए 30 से 45 मिनट का समय निर्धारित था। अब पीरियड का समय बढ़ने से कुल पढ़ाई का समय भी बढ़ गया है।

मध्यांतर (लंच ब्रेक) को भी 30 मिनट से बढ़ाकर 40 मिनट कर दिया गया है। हालांकि, शिक्षक संगठनों ने इस नई समय-सारिणी पर कुछ आपत्तियां भी जताई हैं। उनका कहना है कि सुझाव देने के बावजूद उन पर ध्यान नहीं दिया गया।

शिक्षा विभाग का कहना है कि यह बदलाव छात्रों के हित और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए किया गया है। सरकार ने निजी स्कूलों के लिए भी मानक समय-सारिणी जारी की है, लेकिन अधिकांश निजी स्कूल अपनी सुविधा के अनुसार समय तय कर रहे हैं।

नई व्यवस्था से शिक्षा प्रणाली में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़े हुए समय से विद्यार्थियों को विषयों की बेहतर समझ मिलेगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में इस बदलाव के प्रभाव को लेकर भी निगरानी की जाएगी। अभिभावकों ने इस निर्णय पर मिश्रित प्रतिक्रिया दी है—कुछ ने इसे सकारात्मक कदम बताया, तो कुछ ने छोटे बच्चों पर दबाव बढ़ने की चिंता जताई।

सरकार ने संकेत दिए हैं कि आवश्यकता पड़ने पर इस समय-सारिणी में आगे संशोधन भी किया जा सकता है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Related Articles