इस अवसर पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि किसी कार्य को बोलना सरल होता है, लेकिन करना कठिन होता है। उन्होंने देश के वैज्ञानिकों को ऋषि की उपमा दी क्योंकि देश के वैज्ञानिक कृषि के क्षेत्र में निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने पूर्व इतिहास के बारे में बताते हुए कहा कि देश में अनाज के लिए भुखमरी थी तथा अनाज बाहरी देशों से मंगाया जाता था, परन्तु वर्तमान में हमारा देश अन्य देशों को अनाज मुहैया करा रहा है, जिसमें देश के कृषि वैज्ञानिकों की अहम भूमिका रही है।

उन्होंने किसानों की आय दोगुनी करने हेतु वैज्ञानिकों, छात्रों एवं कृषि विज्ञान केन्द्रों से नई सोच एवं नई पद्धति में शोध करने की आवश्यकता पर बल दिया। राज्यपाल कोश्यारी ने कहा कि प्रधानमंत्री एक राष्ट्र, एक उर्वरक योजना के तहत किसानों को अधिक से अधिक लाभ प्राप्त हो इस क्षेत्र में प्रयासरत है। उन्होंने वैज्ञानिकों, छात्रों एवं किसानों को एक साथ मिलकर विचार-विमर्श एवं योजना बनाकर कार्य करने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि आज से अपने द्वारा किये गये नये शोधों एवं तकनीकों को उत्तराखंड के अन्तिम किसान तक पहुंचाने का संकल्प लें ताकि पर्वतीय क्षेत्र का विकास हो सके।

अपने संबोधन में कुलपति डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि मानव संसाधनों को विकसित कर नयी शोध तकनीकों को किसानों तक पहुंचाना ही विश्वविद्यालय का उद्देश्य है। विश्वविद्यालय से 5,300 विद्यार्थी विश्व में उच्चतम पदों पर आसीन है और विश्वविद्यालय द्वारा 200 से अधिक तकनीकी विकसित की गयी है। देश में पंतनगर के बीज की मांग अत्यधिक है। उन्होंने कहा कि किसान मेले में दो दिवसों में लगभग 10 हजार किसानों द्वारा भ्रमण किया जा चुका है, जिसमें विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों, अधिकारियों एवं कर्मचारियों का योगदान रहा है।

डा. मनमोहन सिंह चौहान ने कहा कि किसानों द्वारा अधिक रसायनों का उपयोग करने से मिट्टी की गुणवत्ता नष्ट हो रही है, जिससे किसानों की पैदावार में गिरावट आ रही है। उन्होंने पशुपालन में बद्री गाय के दुग्ध को अमृत के रूप में बताया तथा इस नस्ल को बढ़ाने के लिए विश्वविद्यालय वैज्ञानिक प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि मध्यम पहाडी क्षेत्रों में जैविक खेती तथा अधिक ऊंचाई वाले पहाडी क्षेत्रों में प्राकृतिक खेती की अपार संभावनाएं है।

उद्घाटन सत्र के प्रारम्भ में निदेशक प्रसार शिक्षा डा. अनिल कुमार शर्मा ने सभी आगन्तुकों का स्वागत किया। कार्यक्रम के अंत में विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डा. ए.एस. नैन ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों द्वारा विभिन्न कृषि साहित्यों का विमोचन किया गया। गांधी हाल में बड़ी संख्या में अधिष्ठाता, निदेशकगण, किसान, विद्यार्थी, वैज्ञानिक, शिक्षक, अधिकारी एवं अन्य आगंतुक उपस्थित थे। मेले में उत्तराखंड के विभिन्न जनपदों के साथ-साथ अन्य प्रदेशों के किसान भी उपस्थित थे।


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