उत्तराखंड के चमोली जिले की नीती घाटी में सोमवार शाम बादल फटने के बाद अचानक आए जलसैलाब ने भारी तबाही मचा दी। भारत-चीन सीमा क्षेत्र के पास तमक नाले में अचानक पानी का बहाव इतना तेज हो गया कि कुछ ही पलों में वैली ब्रिज देखते ही देखते सैलाब में बह गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। घटना में एक व्यक्ति के लापता होने की सूचना है। राहत और बचाव दल लापता व्यक्ति की तलाश में जुटे हुए हैं।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार शाम नीती घाटी में अचानक मौसम बदला और क्षेत्र में भारी बारिश के साथ बादल फटने की घटना हुई। इसके बाद तमक नाला उफान पर आ गया। पहाड़ी क्षेत्र से तेज गति से मलबे और पानी का सैलाब नीचे आया, जिसने रास्ते में आने वाली संरचनाओं को अपनी चपेट में ले लिया। इसी दौरान ज्योतिर्मठ-मलारी मार्ग पर तमक नाले के ऊपर बना वैली ब्रिज तेज बहाव में बह गया।
बताया जा रहा है कि यह पुल सीमा सड़क संगठन (BRO) की ओर से तैयार किया गया था और करीब एक महीने पहले ही नीती घाटी में तमक नाले पर बनाया गया था। पुल के बह जाने से नीती घाटी का सड़क संपर्क बुरी तरह प्रभावित हुआ है। सीमा क्षेत्र की रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सड़क पर आवाजाही भी बाधित हो गई है। प्रशासन ने सुरक्षा के मद्देनजर मलारी की ओर वाहनों की आवाजाही अस्थायी रूप से रोक दी है।
हादसे के दौरान एक वाहन के भी तेज बहाव की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। इसी क्रम में एक BRO कर्मचारी या वाहन चालक के लापता होने की सूचना है। हालांकि राहत और बचाव अभियान जारी है और लापता व्यक्ति के संबंध में अंतिम स्थिति बचाव दल की तलाश के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी। SDRF और NDRF की टीमें घटनास्थल की ओर रवाना की गई हैं। स्थानीय प्रशासन और अन्य संबंधित विभाग भी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी घटना का संज्ञान लेते हुए प्रशासन को राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने तथा प्रभावित क्षेत्र में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन की प्राथमिकता लापता व्यक्ति की तलाश करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्र में लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
पुल बहने के कारण नीती घाटी के कई क्षेत्रों का जिला मुख्यालय से संपर्क प्रभावित हुआ है। सीमा क्षेत्र में आवाजाही के लिए यह मार्ग बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में पुल के क्षतिग्रस्त होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ सीमा क्षेत्र में तैनात कर्मियों और आवश्यक सेवाओं की आवाजाही पर भी असर पड़ सकता है। अधिकारियों की ओर से स्थिति का आकलन किया जा रहा है और मार्ग को सुरक्षित बनाने के लिए आगे की कार्रवाई की जाएगी।
घटना ने एक बार फिर उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ और बादल फटने की घटनाओं के खतरे को सामने ला दिया है। तमक नाला जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कुछ ही मिनटों में पानी का स्तर खतरनाक रूप ले सकता है। मौसम विभाग की ओर से भी राज्य के कई जिलों में अचानक बाढ़ के जोखिम को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जिसमें चमोली भी शामिल है।
प्रशासन ने लोगों से नदी-नालों और तेज बहाव वाले क्षेत्रों से दूर रहने तथा मौसम खराब होने पर अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है। फिलहाल राहत-बचाव टीमें लापता व्यक्ति की तलाश और स्थिति को सामान्य करने में जुटी हैं।








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