Saturday , 5 September 2026
Home उत्तराखंड न्यूज़ हाईकोर्ट शिफ्टिंग विवाद: कुमाऊं-गढ़वाल के बीच दंगल करवा रही है BJP – कांग्रेस
उत्तराखंड न्यूज़नैनीताल

हाईकोर्ट शिफ्टिंग विवाद: कुमाऊं-गढ़वाल के बीच दंगल करवा रही है BJP – कांग्रेस

हाईकोर्ट शिफ्टिंग को लेकर चल रही कवायद पर रार थमने का नाम नहीं ले रही है। महिलाओं, अधिवक्ताओं, कर्मचारियों और व्यापारियों के बाद अब कुमाऊं के उद्यमी भी नहीं चाहते कि यहां से हाईकोर्ट को गढ़वाल में शिफ्ट किया जाए। उनका कहना है कि हाईकोर्ट ही तो कुमाऊं में एकमात्र बड़ी संस्था है। यदि इसे भी गढ़वाल शिफ्ट कर दिया जाएगा तो कुमाऊं में क्या ही रह जाएगा। ऊधमसिंह नगर जिले के उद्यमियों ने तो हाईकोर्ट को हल्द्वानी या उनके जिले में स्थापित करने की पैरवी की है।

वहीं अब कांग्रेस भी इस दंगल में उतर चुकी है।  कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता एवं पूर्व दर्जा राज्यमंत्री डॉ. गणेश उपाध्याय का कहना है कि हाईकोर्ट के मुद्दे पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और भाजपा सरकार ने चुप्पी साधकर उत्तराखंड के दोनों मंडलों कुमाऊं और गढ़वाल के राजनेताओं, अधिवक्ताओं और आम जनता के बीच दंगल कराने का काम किया है। छोटे राज्य के लिए यह स्थिति बेहद अफसोसजनक है।

नैनीताल हाईकोर्ट शिफ्टिंग को लेकर चल रही कवायद पर रार थमने का नाम नहीं ले रही है। अब इसमें राजनीति भी शुरू हो गई है। कांग्रेस का कहना है कि हाईकोर्ट के मुद्दे पर भाजपा ने कुमाऊं और गढ़वाल के बीच दंगल कराने का काम किया है।

जारी बयान में डॉ. उपाध्याय ने कहा कि राज्य गठन के समय वृहद मंथन के बाद देहरादून को तात्कालिक राजधानी और नैनीताल में हाईकोर्ट बनाने का निर्णय हुआ था। क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्ट की स्थापना नैनीताल में की गई। नैनीताल हाईकोर्ट ने ही पूर्व में गौलापार क्षेत्र में फुल बेंच स्थापित करने पर सहमति दी थी जिस पर राज्य सरकार भी सहमत है। यदि किसी कारणवश यह संभव नहीं है तो किच्छा क्षेत्र में हाईकोर्ट स्थापना के लिए सभी आवश्यक दशाएं मौजूद हैं। पंतनगर एयरपोर्ट, रेलवे, अन्तर्राज्यीय बस अड्डा, नेशनल हाईवे, मेडिकल सुविधाएं और अन्य जिलों से ज्यादा यातायात, आवाजाही एवं संचार की बेहतर सुविधाओं से युक्त है।

Written by
Hill Mail

हिल-मेल का प्रयास जनमानस की आवाज को सही स्तर तक पहुंचाना है। हमने कोशिश की है कि हिल-मेल पहाड़ से जुड़े जनमानस के बीच एक मंच और एक अभियान के रूप में आगे बढ़े। हिल-मेल प्रयत्न कर रहा है कि हिमालय के आंचल में रोजाना की घटने वाली सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, धार्मिक और दैवीय घटनाओं की जानकारी जल्दी से जल्दी लोगों को मिलती रहे।

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related Articles

प्रेशर हॉर्न पर अब सख्ती, दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹10 हजार चालान

उत्तराखंड में वाहनों में प्रेशर हॉर्न लगाने और उनका अनावश्यक इस्तेमाल करने...