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सुरों और रंगों में रची-बसी पहाड़ की होली

बुजुर्ग रागों की गहराई में डूबकर होली का गायन कर रहे हैं, तो युवा पूरे उत्साह के साथ उनका साथ निभा रहे हैं। लोकगीतों में श्रीकृष्ण और राधा के प्रसंगों के साथ पहाड़ की संस्कृति की झलक भी सुनाई दे रही है। हर घर में पकवान बन रहे हैं, गुजिया और मीठे व्यंजनों की खुशबू वातावरण में घुल रही है।

कुमाऊँ में खड़ी होली की टोली गाँव-गाँव घूम रही है और लोग एक-दूसरे के आँगन में जाकर गीतों के माध्यम से शुभकामनाएँ दे रहे हैं। गढ़वाल में भी सामूहिक होली गायन पूरे जोश के साथ जारी है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी इस सांस्कृतिक संध्या का आनंद ले रहे हैं।

रंगों की तैयारी भी साथ-साथ चल रही है और हर चेहरे पर उत्साह साफ झलक रहा है। आपसी मेल-जोल, हँसी-मजाक और गीत-संगीत से पूरा वातावरण होलीमय हो उठा है। ऐसा प्रतीत हो रहा है मानो पूरा गढ़वाल-कुमाऊँ आज सुरों और परंपराओं के रंग में रंग गया हो।

गाँवों में पारंपरिक परिधानों की छटा भी देखने को मिल रही है। महिलाएँ समूह बनाकर होली गीत गा रही हैं और तालियों की गूंज वातावरण को और भी मधुर बना रही है। कई स्थानों पर मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जा रही है। युवा ढोल की थाप पर झूमते नजर आ रहे हैं। दूर-दराज से आए लोग भी इस सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा बन रहे हैं।

रात गहराने के साथ ही गीतों का दौर और भी रंगीन होता जा रहा है। चाय और पारंपरिक पकवानों के साथ बैठकी होली की महफिल सजी हुई है। हर कोई कल की रंगों वाली होली का बेसब्री से इंतजार कर रहा है, लेकिन आज की यह सांस्कृतिक संध्या ही अपने आप में एक अनमोल उत्सव बन चुकी है।

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Hill Mail

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