हिल मेल ब्यूरो, देहरादून
दून स्थित प्रसिद्ध दरबार साहिब में लगने वाले ऐतिहासिक मेले में शुक्रवार को सब कुछ ठीक चल रहा था। श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ा हुआ था कि तभी शाम करीब पौने पांच बजे परिसर में झंडेजी के आरोहण के दौरान ध्वजदंड का एक हिस्सा खंडित होकर श्रद्धालुओं के ऊपर गिर गया। 7 लोग चोटिल हो गए, पर गनीमत रही कि किसी को गंभीर चोट नहीं आई। श्रद्धालुओं का संयम कुछ ऐसा था कि कोई भगदड़ जैसी स्थिति पैदा नहीं हुई और लोगों ने आगे बढ़कर हालात को संभाला।
पूरे प्रदेश में इस बात की काफी चर्चा है। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने लिखा कि किसी भी हादसे के समय इस तरह के अनुशासन और संयम से नुकसान कम किया जा सकता है। आपको बता दें कि जिस समय ध्वजदंड टूटा, उस समय आसपास सैकड़ों की संख्या में लोग मौजूद थे। सेवादारों ने फौरन एंबुलेंस से घायलों को अस्पताल पहुंचाया और फिर कुछ ही देर में भव्य तरीके से झंडा साहिब का आरोहण किया गया।
आलम यह था कि आसपास के घरों की छतों पर भी खड़े होकर लोग झंडा साहिब का आरोहण देखने के लिए जुटे थे। मखमले कपड़े, सुनहरे गोटे और झंडेजी के शीर्ष को सुसज्जित कर आरोहण किया गया। हादसे के एक घंटे के भीतर ही शक्तिपुंज के आरोहण होते ही परिसर ‘जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल’ के जयकारों से गूंज उठा।
(झंडा मेले में उमड़ा जनसैलाब)
बाद में दरबार साहिब के पदाधिकारियों ने बताया कि बारिश के कारण झंडेजी को उठाने वाली लकड़ी के लट्ठों से तैयार कैंची अचानक टूट गई, जिससे हादसा हो गया। गौरतलब है कि सिखों के सातवें गुरु हरराय महाराज के ज्येष्ठ पुत्र गुरु रामराय महाराज ने वर्ष 1675 में चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की पंचमी को दून में कदम रखा था। एक साल बाद इसी दिन उनके सम्मान में एक बड़ा उत्सव मनाया गया। यहीं से झंडेजी मेले की शुरुआत हुई।


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