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उत्तराखंड में अगले कुछ दिनों में मानसून की दस्तक, 29 जून से भारी बारिश का अलर्ट

उत्तराखंड में दक्षिण-पश्चिम मानसून का इंतजार अब समाप्त होने वाला है। मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार प्रदेश में अगले तीन से चार दिनों के भीतर मानसून प्रवेश कर सकता है। फिलहाल राज्यभर में प्री-मानसून गतिविधियां लगातार जारी हैं, जिसके चलते कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश, तेज हवाएं और गर्जन के साथ वर्षा का सिलसिला देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों के लिए शुक्रवार को येलो अलर्ट जारी करते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।

भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार अगले दो से तीन दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून गुजरात, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड और बिहार के शेष हिस्सों के साथ उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुछ और क्षेत्रों में आगे बढ़ने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। यदि मौसम की वर्तमान स्थिति बनी रहती है तो उत्तराखंड में 29 जून से एक जुलाई के बीच मानसून पूरी तरह सक्रिय हो सकता है।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून की सक्रियता के साथ प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में व्यापक वर्षा होने की संभावना है। विशेष रूप से पर्वतीय जिलों में बारिश की तीव्रता अधिक रहने का अनुमान है। इसके चलते भूस्खलन, चट्टान गिरने और पहाड़ी मार्गों के बाधित होने की आशंका भी बढ़ सकती है। प्रशासन को पहले से ही आवश्यक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए हैं।

शुक्रवार के लिए जारी मौसम पूर्वानुमान में पर्वतीय जिलों के कुछ स्थानों पर तेज बारिश, गर्जन और आकाशीय बिजली चमकने के साथ 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसी को देखते हुए मौसम विज्ञान केंद्र ने येलो अलर्ट जारी किया है। वहीं मैदानी जिलों में भी हल्की से मध्यम बारिश के दौर जारी रह सकते हैं।

मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में भी मानसून तेजी से आगे बढ़ रहा है। जम्मू-कश्मीर में 30 जून से एक जुलाई के बीच तथा हिमाचल प्रदेश में भी इसी अवधि में मानसून के सक्रिय होने की संभावना है। उत्तराखंड में मानसून के प्रवेश के साथ ही प्रदेश के अधिकांश क्षेत्रों में नियमित वर्षा का दौर शुरू हो जाएगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून की बारिश कृषि क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी। धान, मक्का, सोयाबीन और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई को इससे गति मिलेगी। हालांकि अत्यधिक वर्षा की स्थिति में नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे निचले इलाकों में जलभराव और बाढ़ जैसी परिस्थितियां भी बन सकती हैं।

मौसम विभाग ने 29 जून से एक जुलाई के बीच उत्तराखंड के कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी भी जारी की है। ऐसे में चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय लोगों को मौसम की ताजा जानकारी पर नजर बनाए रखने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है। विशेषकर पहाड़ी मार्गों पर यात्रा के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतने को कहा गया है।

प्रशासन ने भी संभावित भारी बारिश को देखते हुए जिला अधिकारियों, आपदा प्रबंधन टीमों और संबंधित विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ाई जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया जा सके।

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि मानसून के आगमन के बाद उत्तराखंड में तापमान में गिरावट आएगी और लोगों को उमस व गर्मी से राहत मिलेगी। हालांकि लगातार होने वाली बारिश के दौरान भूस्खलन, सड़क अवरोध और नदी-नालों के उफान जैसी चुनौतियां भी सामने आ सकती हैं। ऐसे में नागरिकों से अपील की गई है कि खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें, मौसम विभाग की चेतावनियों पर ध्यान दें और किसी भी आपदा की स्थिति में स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करें।

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Hill Mail

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