देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को राष्ट्रीय सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी अभियानों और भारत की सुरक्षा नीति को मजबूत बनाने में उनके असाधारण योगदान के लिए प्रतिष्ठित लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। तिलक स्मारक ट्रस्ट ने सोमवार को इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह सम्मान उन्हें 1 अगस्त को पुणे में आयोजित एक विशेष समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हाथों प्रदान किया जाएगा।
तिलक स्मारक ट्रस्ट के अध्यक्ष डॉ. रोहित तिलक ने प्रेस वार्ता में बताया कि देश की आंतरिक और बाहरी सुरक्षा को सुदृढ़ बनाने में अजीत डोभाल की दशकों लंबी सेवाओं को देखते हुए उन्हें इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है। उन्होंने कहा कि डोभाल ने अपने लंबे प्रशासनिक और रणनीतिक अनुभव से भारत की सुरक्षा व्यवस्था को नई दिशा दी है और अनेक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
81 वर्षीय अजीत डोभाल भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी हैं और उन्हें देश के सबसे अनुभवी सुरक्षा विशेषज्ञों में गिना जाता है। वे वर्ष 2014 से भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं और इस पद पर सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले अधिकारी हैं। अपने करियर के दौरान उन्होंने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। इन क्षेत्रों में उग्रवाद और आतंकवाद से जुड़े मामलों से निपटने में उनकी रणनीति और नेतृत्व की व्यापक सराहना हुई।
डोभाल ने विदेशों में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में कूटनीतिक जिम्मेदारियां निभाईं, जहां सुरक्षा और खुफिया मामलों में उनकी विशेषज्ञता का उपयोग किया गया। लंबे समय तक खुफिया एजेंसी में कार्य करने के कारण उन्हें जमीनी स्तर पर सुरक्षा चुनौतियों की गहरी समझ रखने वाला अधिकारी माना जाता है।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार के रूप में अजीत डोभाल ने भारत की सुरक्षा नीति को अधिक प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सीमा सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी रणनीति, खुफिया समन्वय और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई अहम निर्णयों में उनकी प्रमुख भागीदारी रही है। उनकी रणनीतिक सोच और निर्णायक कार्यशैली ने उन्हें देश के सबसे प्रभावशाली सुरक्षा विशेषज्ञों में शामिल किया है।
लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की स्थापना वर्ष 1983 में तिलक स्मारक ट्रस्ट द्वारा की गई थी। यह सम्मान स्वतंत्रता संग्राम के महानायक लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि, 1 अगस्त, के अवसर पर हर वर्ष ऐसे व्यक्ति को प्रदान किया जाता है जिसने राष्ट्र निर्माण, सार्वजनिक जीवन, विज्ञान, शिक्षा, प्रशासन, सामाजिक सेवा या अन्य क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
इस पुरस्कार का पहला सम्मान समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को प्रदान किया गया था। इसके बाद देश की कई प्रतिष्ठित हस्तियां इस सम्मान से अलंकृत हो चुकी हैं। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, डॉ. मनमोहन सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा वरिष्ठ राजनीतिज्ञ शरद पवार जैसे नाम शामिल हैं।
अजीत डोभाल का इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चयन राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके लंबे, समर्पित और प्रभावशाली योगदान की एक महत्वपूर्ण मान्यता माना जा रहा है। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सम्मान न केवल डोभाल के व्यक्तिगत योगदान का सम्मान है, बल्कि उन सभी सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और अधिकारियों के प्रयासों की भी सराहना है जो देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में लगातार जुटे रहते हैं। 1 अगस्त को पुणे में आयोजित होने वाला यह सम्मान समारोह राष्ट्रीय सुरक्षा और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित व्यक्तित्वों के सम्मान का एक महत्वपूर्ण अवसर होगा।








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