भगवान केदारनाथ धाम के कपाट बुधवार सुबह 6.10 बजे मेष लग्न में ग्रीष्मकाल के लिए खुल गए हैं। अगले छह महीने तक बाबा केदारनाथ की पूजा-अर्चना केदार धाम में ही होगी। केदारनाथ धाम के कपाट खुलने के समय पूजा में पुजारी समेत सिर्फ 16 लोग ही शामिल हुए। इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का भी ध्यान रखा गया। कोरोना संक्रमण के चलते चारधाम यात्रा को श्रद्धालुओं के लिए अभी नहीं खोला गया है।
सुबह सबसे पहले मंदिर के सीलबंद मुख्य कपाट को खोला गया। इसके बाद गर्भगृह में पूजा अर्चना की गई। मुख्य पुजारी शिवशंकर लिंग ने मंदिर के अंदर कपाट खुलने पर संपन्न होने वाली पूजाएं व सभी औपचारिकताएं पूरी की। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से प्रथम पूजा की गई। कपाट खुलने के मौके पर कोई भी भक्त मौजूद नहीं था।
आमतौर पर कपाट खुलने के दिव्य पल का साक्षी बनने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु और साधु संत केदार धाम पहुंचते हैं। कोरोना महामारी के चलते प्रशासन ने भक्तों को मंदिर में दर्शन की अनुमति प्रशासन ने नहीं दी है। इस बार सीमित संख्या में कर्मचारी, पुजारी और वेदपाठी ही केदारनाथ धाम में मौजूद रहेंगे। मंदिर में केवल भोग, दोपहर का श्रृंगार और सांयकालीन आरती ही होगी।
बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली 26 अप्रैल को पंचगद्दी स्थल ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ से गौरीकुंड के लिए रवाना हुई और 27 अप्रैल को केदारनाथ पहुंच गई। हालांकि, डोली को पैदल मार्ग पर भीमबली में अपना दूसरा पड़ाव डालना था, लेकिन प्रशासन ने डोली को सीधे केदारनाथ पहुंचाने का निर्णय लिया।
प्रशासन की मौजूदगी में केदारनाथ मंदिर के मुख्य द्वार को खोलते मुख्य पुजारी।

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी श्रद्धालुओं को बाबा केदारनाथ के धाम के कपाट खुलने की शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में कहा, सभी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं। आपका मनोरथ पूर्ण हो, बाबा केदार का आशीष सभी पर बना रहे, ऐसी मैं भगवान केदारनाथ से कामना करता हूं। कोरोना महामारी के इस वैश्विक संकट में हम बाबा केदार की आराधना घर में रह कर ही करें, सोशल डिस्टेंसिंग का अवश्य अनुपालन करें,घर में रहें, सुरक्षित रहें।
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