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राष्ट्रपति ने सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में ऐतिहासिक उड़ान भरी

राष्ट्रपति की सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान, भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, सशस्त्र बलों के साथ जुड़ने के उनके प्रयासों का एक हिस्सा है। मार्च 2023 में, राष्ट्रपति ने आईएनएस विक्रांत का दौरा किया था और स्वदेश निर्मित विमान पर अधिकारियों एवं नाविकों के साथ बातचीत की थी। राष्ट्रपति मुर्मु, इस तरह की उड़ान भरने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 8 अप्रैल, 2023 को असम के तेजपुर वायु सेना स्टेशन पर सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में ऐतिहासिक उड़ान भरी। राष्ट्रपति, जो भारतीय सशस्त्र बलों की सर्वोच्च कमांडर हैं, ने ब्रह्मपुत्र और तेजपुर घाटी को कवर करते हुए लगभग 30 मिनट तक उड़ान भरी और वायु सेना स्टेशन लौटने से पहले उड़ान के दौरान हिमालय के दृश्य भी देखे।

विमान को 106 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर ग्रुप कैप्टन नवीन कुमार ने उड़ाया था। विमान ने समुद्र तल से करीब दो किलोमीटर की ऊंचाई पर और करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से उड़ान भरी। राष्ट्रपति मुर्मु, इस तरह की उड़ान भरने वाली तीसरी राष्ट्रपति और दूसरी महिला राष्ट्रपति हैं।

राष्ट्रपति ने बाद में आगंतुक पुस्तिका में एक संक्षिप्त नोट लिखकर अपनी भावनाओं को व्यक्त किया, जिसमें उन्होंने कहा, “भारतीय वायु सेना के शक्तिशाली सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान भरना, मेरे लिए एक उत्साहजनक अनुभव रहा। यह गर्व की बात है कि भूमि, वायु और समुद्र की सभी सीमाओं को कवर करने के लिए भारत की रक्षा क्षमताओं का अत्यधिक विस्तार हुआ है। मैं इस उड़ान के आयोजन के लिए भारतीय वायु सेना और तेजपुर वायु सेना स्टेशन की पूरी टीम को बधाई देती हूं।“

राष्ट्रपति को विमान और भारतीय वायु सेना (आईएएफ) की परिचालन क्षमताओं के बारे में भी जानकारी दी गई। उन्होंने भारतीय वायुसेना की परिचालन तैयारियों पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि भूमि, वायु और समुद्र की सभी सीमाओं को कवर करने के लिए भारत की रक्षा क्षमताओं का अत्यधिक विस्तार हुआ है।

राष्ट्रपति की सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान में उड़ान, भारतीय सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर के रूप में, सशस्त्र बलों के साथ जुड़ने के उनके प्रयासों का एक हिस्सा है। मार्च 2023 में, राष्ट्रपति ने आईएनएस विक्रांत का दौरा किया था और स्वदेश निर्मित विमान पर अधिकारियों एवं नाविकों के साथ बातचीत की थी।

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