बर्फ ही हिमालय का आभूषण है, और मां गंगा जी का श्रृंगार भी

बर्फ ही हिमालय का आभूषण है, और मां गंगा जी का श्रृंगार भी

हिमालयी राज्यों में अभी हाल में हुई भारी बर्फबारी हिमालय के पर्यावरण के लिए, हिमालय के सौंदर्य के लिए वरदान है… बर्फ ही हिमालय का सौंदर्य है और आभूषण भी।

लोकेन्द्र सिंह बिष्ट

पर्यावरण के लिए, हिमालय के लिए, हिमालय में विद्यमान ग्लेशियरों, नदियों, झरनों, तालाबों, प्राकृतिक जलस्रोतों, जल, जंगलों, जड़ी, बूटियों, फल, फूलों, बुगयालों और यहां की फसलों के लिए वरदान है नवंबर दिसंबर में होने वाली बर्फबारी… मुझे अफशोस है कि देश के प्रतिष्ठित खबरिया चैनलों ने अभी हाल की हिमालयी राज्यों में हुई भारी बर्फबारी को लेकर हायतोबा मचा रखी है, जो कि उनकी पर्यावरण को लेकर उनकी नासमझी को दर्शाती है…।

हिमालयी राज्यों खासकर बर्फबारी वाले इलाकों में लोग आदि अनादि काल से जीवन यापन कर रहे हैं, इन इलाकों में रहने वाले लोग जानते हैं कि बर्फबारी के दौरान जीवन यापन कैसे करना है…। इन लोगों ने मौसम के हिसाब से इन स्थानों में जीवन गुजर बसर करने की तकनीक ईजाद कर रखी है।

6 महीनों तक भारी बर्फबारी के दौरान माइनस डिग्री को झेलने व बर्फीली हवाओं को मात देने के लिये घरों का निर्माण भी उसी के अनुरूप निर्माण की तकनीकी ईजाद कर रखी है… स्वयं के लिए राशन, खाने पीने, दवा दारू व मवेशियों के लिए चारे पत्ती की माकूल व्यवस्था की हुई रहती है। इतना जरूर है कि उनका आवागमन भले ही बंद हो जाता है लेकिन इसके लिए वे तैयार रहते हैं… इतना जरूर है कि खबरिया चैनल बर्फबारी को हव्वा बना देते हैं…।

दरअसल पिछले डेढ़ दशक से समूचे विश्व का ऋतुचक्र डगमगा गया है… हिमालयी राज्यों में बर्फबारी जनवरी से लेकर मार्च तक हो रही थी जो हिमालय ओर उसके पर्यावरण के लिए घातक शाबित हो रही थी। हिमालय में तेज़ी से बर्फ पिघलने का दौर जारी है। यहां विद्यमान ग्लेशियर तेज़ी के साथ पिघल रहे हैं। जिनमे मां गंगा का उद्गम श्रोत गौमुख यानी गंगोत्री ग्लेशियर सबसे तेजी के साथ पिघल रहा है। समूचे हिमालय में जगह जगह धरती निकल आयी है। दरअसल वर्षभर हिमाच्छादित रहने वाले हिमालय में बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ गई है, जिसके चलते समूचे हिमालय में जगह जगह जमीन दिखायी देने लग गई है।

जनवरी में सूर्य मकर रेखा पर आने से मौसम में गर्माहट आ जाती है उसके बाद फरवरी से लेकर मार्च तक कि बर्फबारी हिमालय के लिए घातक साबित होती है, इस दौरान की बर्फबारी पहले से ही हिमालय में मौजूद बर्फ के लिए घातक होती है। इस दौरान की बर्फबारी पहले से मौजूद बर्फ को भी तेज़ी से पिघलने पिघलाने में सहायक बनती है। हिमालय में विद्यमान ग्लेशियरों के लिए भी जनवरी से लेकर मार्च की बर्फबारी अभिशाप बनकर आती है…।

अभी नवंबर से लेकर दिसंबर की बर्फबारी हिमालय में विद्यमान बर्फ व ग्लेशियरों के लिए कवच का काम करती है। आजकल की ही बर्फबारी से समूचे हिमालय व उसके ग्लेशियरों पर बर्फ की परतें चढ़ाती हैं। आजकल की बर्फबारी से ही ग्लेशियरों में एक के बाद एक परत बिछती जाती है, बर्फ की इन्हीं परत दर परतों से ही ग्लेशियरों का निर्माण होता है… और इन्हीं बर्फ की 2 से लेकर 12 फ़ीट मोटाई तक कि मोटी मोटी परतें हिमालय और उसके ग्लेशियरों को मई जून से लेकर सितम्बर तक सुरक्षित रखती हैं…।

पिछले डेढ़ दशक से नवंबर दिसंबर में बर्फबारी न होने के चलते हिमालय में विद्यमान बर्फ पिघलती रही और परिणाम ये हुआ कि हिमालय जगह जगह बर्फ से वीरान हो गया। वर्षभर बर्फ की चादर से ढके हिमालय में जगह जगह धरती आसमान झांकने लगी। समूचे हिमालय में बर्फ की ये मजबूत और मोटी मोटी चादरें फट ही नहीं रही हैं बल्कि उधड़ रहीं हैं। आपको बताते चलें कि फटने का इलाज तो प्रकृति के पास भी है और मानव के पास भी… ले​किन उधड़ने का इलाज न प्रकृति के पास है न मानव के पास।

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