इस अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में खेल विश्वविद्यालय का निर्माण हो रहा है जिसका नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा जाएगा। खटीमा में कंजाबाग तिराहे का नाम महाराणा प्रताप के नाम पर रखा जाएगा। इस चैराहे पर महाराणा प्रताप की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। खटीमा में महाराणा प्रताप प्रशासनिक एकेडमी प्रशिक्षण केंद्र का निर्माण किया जाएगा। खटीमा के जनजातीय बाहुल्य क्षेत्रों में भूमसेन का निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि खटीमा की जनता के समर्थन के बूते मुख्य सेवक के रूप में उन्हें काम करने का मौका मिला और जब भी हुए खटीमा आते हैं भावविभोर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि खटीमा का थारू जनजातीय समाज सरल स्वभाव के साथ-साथ ईमानदार व्यक्तित्व का भी धनी है। जनजातीय समूहों का जीवन संस्कृति का एक विशेष दर्शन है जो प्रकृति के साथ समन्वय बिठाकर जीवन जीते हैं।
पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि खटीमा की धरती स्वतंत्रता संग्राम की धरती रही है यहां से अनेक वीरों ने जन्म लिया है, चाहे राज्य गठन का आंदोलन हो या स्वतंत्रता संग्राम की घटना इस धरती का इतिहास वीरता के उदाहरणों से भरा हुआ है। उन्होंने कहा कि उनका हमेशा से सपना था कि खटीमा में कोई ऐसा संस्थान होना चाहिए जिसके माध्यम से जनजातीय बच्चे बहुत शानदार तरीके से आगे बढ़ें। अब वो सपना एकलव्य आवासीय विद्यालय के रूप में साकार हो रहा है जो जनजातियों के विकास में मील का पत्थर साबित होगा।
इस दौरान अल्मोड़ा सांसद अजय टम्टा, विधायक नानकमत्ता प्रेम सिंह राणा, विधायक चंपावत कैलाश गहतोड़ी, कुमायूं आयुक्त दीपक रावत, डीआईजी कुमायूं निलेश आनंद भरणे, निदेशक जनजाति कल्याण संजय टोलिया, गीता धामी समेत जिला प्रशासन के अधिकारी एवं बड़ी संख्या में जनजातीय समुदाय से जुड़े लोग मौजूद रहे।




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