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लंबे समय से विपक्ष यह आरोप लगा रहा था कि भाजपा कुमाऊं की उपेक्षा कर रही है। पार्टी को भी कुमाऊं से एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जिस पर लंबा दांव खेला जा सके। कुमाऊं से आने वाले राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरे हरीश रावत के सामने खड़ा किया जा सके। ऐसे में राजपूत समुदाय से आने वाले धामी फिट बैठते हैं। एक ही फैसले से जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साध लिए गए।
READ MOREइस समय उत्तराखंड में भाजपा का संगठन एकजुट है। पार्टी में खेमेबाजी नहीं दिखाई दे रही। बीच-बीच में कुछ सदाबहार बागी नेताओं के बारे में सुनने में आता है कि वे बगावत कर सकते हैं, लेकिन हर बार त्रिवेंद्र सिंह रावत और भी मजबूत होकर लौटे हैं।
READ MOREगैरसैंण का मुद्दा भाजपा के घोषणापत्र में तो था लेकिन मुख्यमंत्री इतने अप्रत्याशित ढंग से ऐलान करेंगे, इसकी कल्पना तो विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने भी नहीं की होगी। यह एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।
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लंबे समय से विपक्ष यह आरोप लगा रहा था कि भाजपा कुमाऊं की उपेक्षा कर रही है। पार्टी को भी कुमाऊं से एक ऐसे चेहरे की तलाश थी, जिस पर लंबा दांव खेला जा सके। कुमाऊं से आने वाले राज्य के सबसे बड़े राजनीतिक चेहरे हरीश रावत के सामने खड़ा किया जा सके। ऐसे में राजपूत समुदाय से आने वाले धामी फिट बैठते हैं। एक ही फैसले से जातिगत और क्षेत्रीय समीकरण साध लिए गए।
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इस समय उत्तराखंड में भाजपा का संगठन एकजुट है। पार्टी में खेमेबाजी नहीं दिखाई दे रही। बीच-बीच में कुछ सदाबहार बागी नेताओं के बारे में सुनने में आता है कि वे बगावत कर सकते हैं, लेकिन हर बार त्रिवेंद्र सिंह रावत और भी मजबूत होकर लौटे हैं।
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