Sunday , 6 September 2026
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गैरसैंण पर फैसला: जनमानस की भावनाओं को मिला सम्मान

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उत्तराखंड की त्रिवेंद्र सिंह सरकार ने तीन साल पूरे कर लिए हैं। तीन साल का समय किसी भी सरकार के कामकाज के आकलन के लिए पर्याप्त होता है। तीन साल पहले जब भाजपा नेतृत्व ने प्रचंड जनादेश के बाद त्रिवेंद्र सिंह को सूबे की कमान सौंपी थी तो कई लोगों को संशय रहा होगा लेकिन इन तीन साल के दौरान उन्होंने जिस तरह निर्विवाद सरकार का नेतृत्व किया उसने साबित किया है कि केंद्रीय नेतृत्व का उन पर भरोसा जताना एक दूरदर्शी सोच का नतीजा था। इन तीन साल के दौरान राज्य ने कई मोर्चों पर नई पहल होते देखी और राज्य सरकार की ओर से कई अप्रत्याशित फैसले भी लिए गए। अपनी सरकार के तीन साल पूरे होने से ऐन पहले त्रिवेंद्र सिंह रावत ने अपने सियासी करियर का सबसे बड़ा फैसला लिया और गैरसैंण को उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का ऐलान कर विपक्षी दलों एवं आलोचकों को सन्न कर दिया। गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाने का मुद्दा भाजपा के घोषणापत्र में था लेकिन मुख्यमंत्री इतने अप्रत्याशित ढंग से इसका ऐलान करेंगे, इसकी कल्पना तो विपक्ष के साथ-साथ सत्ता पक्ष के कई नेताओं ने भी नहीं की होगी। यह एक ऐसा मास्टरस्ट्रोक है, जिसकी गूंज लंबे समय तक सुनाई देगी।

उत्तराखंड राज्य के गठन के बाद से ही गैरसैंण पर्वतीय जनमानस की भावनाओं का प्रतीक रहा। हालांकि यह मसला हमेशा स्थायी और अस्थायी राजधानी की अटकलों के बीच ही झूलता रहा। दरअसल उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौर में पर्वतीय जनमानस ने गैरसैंण को राजधानी बनाए जाने पर अपनी मुहर लगा दी थी। उस समय राज्य आंदोलनकारियों ने राजधानी गैरसैंण का नामकरण पेशावर कांड के नायक वीर चंद्र सिंह गढ़वाली के नाम पर चंद्रनगर किया था। राज्य आंदोलन के दौर से गैरसैंण को राजधानी के रूप में देखा जाने लगा। इसका प्रभाव यह हुआ कि राज्य बनने के बाद भी गैरसैंण राजधानी को लेकर इच्छाएं जनमानस के दिलोदिमाग पर छाईं रहीं।

त्रिवेंद्र सिंह रावत ने गैरसैंण को राजधानी बनाने का फैसला ऐसे समय में किया जब लोग भी इसे महज चुनावी जुमला मानने लगे थे। सूबे की सियासत में हाशिए पर जा चुके उत्तराखंड क्रांति दल में भी इस मुद्दे पर चुप्पी नजर आती थी। त्रिवेंद्र ऐसे यह फैसला लेंगे, इसका अंदाजा तो कांग्रेस को भी नहीं था, यही वजह थी की सीएम के ऐलान के बाद उनके पास सिर्फ यही कहने को था कि कांग्रेस को सत्ता मिली को गैरसैंण को स्थायी राजधानी बनाएंगे।

गैरसैंण ही नहीं, तीन साल में लिए कई बड़े फैसले

त्रिवेंद्र सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल पर नजर डालें तो गैरसैंण जैसे मास्टरस्ट्रोक के अलावा राज्य में देवस्थानम चारधाम बोर्ड का गठन और ट्रांसफर एक्ट जैसे महत्वपूर्ण संस्थागत सुधार किए गए हैं। सुशासन और भ्रष्टाचार पर लगाम कसने के लिए राज्य में ई-गवर्नेंस और ई-टेंडरिंग की प्रक्रिया शुरू हुई है। राज्य में अटल आयुष्मान योजना में 5 लाख तक का मुफ्त इलाज, स्कूलों में एनसीईआरटी की किताबें लागू करना, सीएम हेल्पलाइन 1905 का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया गया है।

केंद्र में भी भाजपा की सरकार होने का फायदा भी उत्तराखंड को काफी हद तक हुआ है। केंद्र की ओर से राज्य को धन की कमी नहीं होने दी गई। राज्य में एक लाख करोड़ रुपये की योजनाएं मंजूर की गईं। कई प्रोजेक्ट पर बहुत तेजी से काम चल रहा है। इनमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट ऑल वेदर रोड और केदारनाथ धाम पुनर्निर्माण के साथ-साथ भारतमाला परियोजना, जमरानी बहुद्देशीय परियोजना, नमामि गंगे, देहरादून स्मार्ट सिटी, दिल्ली-देहरादून वाया सहारनपुर हाइवे आदि प्रमुख हैं। राज्य में सड़क कनेक्टिविटी के साथ रेल कनेक्टिविटी पर काफी काम हो रहा है। ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत साल 2021 तक श्रीनगर और वर्ष 2025 तक कर्णप्रयाग तक रेललाइन पहुंचाने की दिशा में काफी प्रगति हुई है।

पिछले कुछ समय में उत्तराखंड में एयर कनेक्टिविटी भी तेजी भी बढ़ी है। राज्य में कई जगह हेली सेवाओं की शुरुआत हुई है। राज्य सरकार का लक्ष्य 2022 तक सभी गांवों को सड़क से जोड़ने का है। सौभाग्य योजना से घर-घर बिजली पहुंची है। हाल ही में प्रदेश में 15.09 लाख परिवारों को ‘हर घर को नल से जल’ दिलाने की योजना शुरू हुई है। सरकार का दावा है कि तीन साल में यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। हाल के वर्षों में उत्तराखंड में पीने का पानी एक बड़ी समस्या बनकर उभरा है, ऐसे में यह योजना सरकार के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। राज्य में जल संरक्षण और जल संवर्धन पर काम शुरू हुआ है। ग्रेविटी वाली पेयजल योजनाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। उत्तराखंड वाटर मैनेजमेंट प्रोजेक्ट को भारत सरकार द्वारा सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है।

रिवर्स पलायन पर हुआ काफी काम

त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल के दौरान रिवर्स पलायन पर सुनियोजित तरीके से काम शुरू किया है। राज्य सरकार पहाड़ों में स्व-रोजगार को बढ़ावा देने के लिए होम स्टे कान्सेप्ट को प्रचारित कर रही है। राज्य में 2020 के अंत तक पांच हजार हो स्टे विकसित करने का लक्ष्य है। 13 डिस्ट्रिक्ट-13 डेस्टीनेशन से नए पर्यटन केंद्र विकसित करने पर भी काम हो रहा है। सौर ऊर्जा और पिरूल ऊर्जा नीति से ग्रामीण युवाओं की आजीविका बढ़ाने की कोशिश की गई है। पलायन की समस्या से निपटने के लिए राज्य में ग्रामीण विकास और पलायन आयोग का गठन किया गया है। सीमांत तहसीलों के लिए मुख्यमंत्री सीमांत क्षेत्र विकास योजना शुरू की गई है। राजकीय स्कूलों में वर्चुअल क्लासेज शुरू हुई हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन और टेलीरेडियोलॉजी ने अच्छे रिजल्ट देने शुरू किए हैं। किसानों और महिला स्वयं सहायता समूहों को ब्याज रहित ऋण उपलब्ध कराने की दिशा में भी काफी काम हुआ है।

आने वाले दो वर्षों में त्रिवेंद्र सिंह सरकार की असली परीक्षा इन योजनाओं को पूरा करना होगी। 2021 में हरिद्वार में लगने वाला महाकुंभ भी राज्य सरकार की कार्यकुशलता की परीक्षा होगा। इस बार तुलना उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में संपन्न हुए कुंभ से होगी, लिहाजा सीएम त्रिवेंद्र सिंह को अतिरिक्त सक्रियता दिखानी होगी। रोजगार के क्षेत्र में सबसे ज्यादा ध्यान दिए जाने की जरूरत है, पिछले कुछ समय में राज्य में बेरोजगारी की दर बढ़कर 4.2 फीसदी तक पहुंच गई है, ऐसे में राज्य सरकार युवाओं को कैसे रोजगार के विकल्प मुहैया कराती है, यह भी देखने वाली बात होगी। फिलहाल तीन साल के दौरान भ्रष्टाचार का आरोप न लगना भी त्रिवेंद्र सिंह सरकार की बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।

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Hill Mail

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