उत्तराखंड के अनेक सामाजिक संगठनों ने आज दिल्ली के जंतर मंतर में नजफगढ़ की दामिनी के गुनाहगारों को सजा दिलाने के लिए कैडिंल मार्च निकाला। इस अवसर पर दामिनी के माता पिता के अलावा उत्तराखंड के अनेक सामाजिक संगठनों के लोगों ने हिस्सा लिया।
नजफगढ़ की दामिनी के साथ 9 फरवरी 2012 को जघन्य कृत्य किया गया था। उसके बाद द्वारका कोर्ट व दिल्ली हाई कोर्ट गुनाहगारों को 2014 में फांसी की सजा दे दी थी। उसके बाद गुनाहगार न्याय पाने के लिए 2015 में सर्वोच्च न्यायालय में गये। लेकिन इतने साल बीत जाने के बाद भी नजफगढ़ की दामिनी के परिवार को अभी तक न्याय नहीं मिला है।
दामिनी के गुनाहगारों को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इतने सालों में सजा न दिये जाने पर उनके परिवार और आम लोगों में काफी आक्रोश है। आज दामिनी के माता पिता व परिजनों के साथ सैकड़ों लोगों ने जंतर मंतर पर त्वरित न्याय की आशा में मोमबत्ती जलाकर ‘नजफगढ़ की दामिनी के गुनाहगारों को, फांसी दो, फांसी दो’ के नारे लगाये। जिससे कि उच्च न्यायालय से इस परिवार को जल्दी से जल्दी न्याय मिल सके।
जंतर मंतर में आये वक्ताओं ने कहा कि गरीब और असहाय लोगों को न्याय मिलने में कितना साल लग जाते हैं। जब तक न्यायलयों की जवाबदेही तय नहीं होगी तब तक तारीख पर तारीख मिलती रहेगी। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में नजफगढ़ की दामिनी के गुनाहगारों को तुरंत फांसी की सजा देने की पुरजोर मांग की।
इस अवसर पर उत्तराखंड के कई सामाजिक संगठनों के अलावा बड़ी संख्या में महिलाओं ने भी हिस्सा लिया और सभी लोगों का विचार था कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर ऐसे परिवारों को न्याय दिलाने की कोशिश की जानी चाहिए।


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