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नैनीताल में मिला दुर्लभ मूंगा खुकरी सांप, पहली बार 1936 में दिखा था

दुर्लभ प्रजाति का होने के कारण यह सांप वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के शेड्यूल 4 में आता है। इसके बचाव के लिए जीव विज्ञानी प्रयासरत है। बारिश के मौसम में पानी आने या गर्मी से सांप ज्यादा निकलते हैं पर यह सांप गिनती के करीब 3 बार ही देखा गया है।

आमतौर पर गर्मी और बरसात के दिनों में उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में सांप ज्यादा देखे जाते हैं। बिल में गर्मी होने के कारण या पानी भर जाने की वजह से उन्हें बाहर आना पड़ता है। हालांकि इस बार नैनीताल जिले में बिंदुखत्ता क्षेत्र के कुररिया खट्टा गांव में एक दुर्लभ प्रजाति का सांप बहुत सालों बाद देखा गया।

यह दुर्लभ रेड कोरल खुकरी सांप पहली बार 1936 में लखीमपुर खीरी में दिखा था। इसके बाद 2015 में इसे वन विभाग के विशेषज्ञों द्वारा बिंदुखत्ता क्षेत्र में ही देखा था। इसके बाद यह अब 2020 में दिखाई दिया है जिससे यह क्षेत्र के लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

इसके रेड कोरल खुकरी नाम में ‘खुकरी’ वही शब्द है, जो गोरखाओं के एक चाकूनुमा हथियार को कहते हैं और यह थोड़ा घुमावदार होता है। रेड कोरल के दांत खुकरी की तरह घुमावदार होते हैं। ये सांप रात में ज्यादा गतिविधि करते हैं और चमकीले मूंगा के रंग के होते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह सांप जहरीला नहीं होता और जिंदा रहने के लिए कीड़ों का भोजन करता है। इसका वैज्ञानिक नाम ‘ओलिगोडोन खेरिएन्सिस’है। कुररिया खट्टा गांव के कविंद्र कोरंगा सांपों के रेस्क्यू का काम करते हैं। सुबह उन्हें गांववालों का फोन आया तो उन्होंने वन प्रभाग को भी सूचित किया। इसके बाद सांप को ग्रामीणों से रेस्क्यू कर जंगल में छोड़ दिया गया।

दिलचस्प बात यह है कि यह सांप उत्तराखंड में अब तक केवल 2 बार जिंदा और एक बार मृत देखा गया है। दुर्लभ प्रजाति का होने के कारण यह सांप वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के शेड्यूल 4 में आता है। इसके बचाव के लिए जीव विज्ञानी प्रयासरत है। इस सांप को एक बार दुधवा टाइगर रिजर्व उत्तर प्रदेश और एक बार नेपाल में भी देखा गया है। यह अधिकतर जमीन के नीचे ही रहता है।

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Hill Mail

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