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चारधाम यात्रा पर आने वाले यात्री स्वास्थ्य जांच कर यात्रा करें

उत्तराखंड चारधाम यात्रा 2022: कपाट खुलने का कार्यक्रम जारी, अब नहीं कराना होगा कोरोना टेस्ट

उत्तराखंड में 3 मई को चारधाम यात्रा की शुरुआत के बाद से, कम से कम 39 तीर्थयात्रियों की रास्ते में मौत हो गई है, मुख्य रूप से हृदय संबंधी मुद्दों जैसे दिल का दौरा, उच्च रक्तचाप, या अन्य कॉमरेडिडिटी के कारण। यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक तीन लाख से अधिक श्रद्धालु चार धाम के दर्शन कर चुके हैं।

उत्तराखंड में 3 मई को चारधाम यात्रा की शुरुआत के बाद से, कम से कम 39 तीर्थयात्रियों की रास्ते में मौत हो गई है, मुख्य रूप से हृदय संबंधी मुद्दों जैसे दिल का दौरा, उच्च रक्तचाप, या अन्य कॉमरेडिडिटी के कारण। यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक छः लाख से अधिक श्रद्धालु चारधाम के दर्शन कर चुके हैं।

मरने वालों में से अधिकांश 60 वर्ष से अधिक आयु के थे, हृदय संबंधी समस्याओं से पीड़ित थे, और 10,000 फीट और 12 के बीच की ऊंचाई पर स्थित मंदिरों में जाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

2017 और 2018 में क्रमश: 112 और 102 तीर्थयात्रियों की मौत हुई। 2019 में, लगभग 38 लाख तीर्थयात्रियों ने यात्रा की और 90 से अधिक तीर्थयात्रियों की मृत्यु हो गई। 

उत्तराखंड में चारधाम यात्रा ऊंचाई पर स्थित है। आने वाले लोग अचानक कम तापमान, कम आर्द्रता, बढ़ी हुई पराबैंगनी विकिरण, कम हवा के दबाव और कम ऑक्सीजन से प्रभावित होते हैं

तीर्थ स्थल उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री और गंगोत्री, रुद्रप्रयाग में केदारनाथ और चमोली में बद्रीनाथ हैं। जहां केदारनाथ लगभग 11,700 फीट की ऊंचाई पर सबसे ऊंचा है, वहीं केदारनाथ ट्रेक कोन है

केदारनाथ पहुंचने के लिए लोग सोनप्रयाग में अपने वाहन पार्क करते हैं। 16 किमी का ट्रेक वहीं से शुरू होता है। वहां से सरकार ने भक्तों को गौरीकुंड (करीब 8 किमी) तक ले जाने के लिए वाहन उपलब्ध कराए हैं लेकिन इन वाहनों के रूप में

क्या सावधानियां बरती जा सकती हैं?

यात्रा की योजना बनाने से पहले सबसे महत्वपूर्ण कदम एक चिकित्सा परीक्षण करवाना और सभी आवश्यक दवाएं हाथ में रखना है। बुजुर्ग, कॉमरेडिडिटी वाले और कोविड -19 से उबरने वाले लोग

यात्रा पर जाने वालों को ट्रेक पर एक दिन का विश्राम अवश्य करना चाहिए। लोग शरीर को कम ऑक्सीजन के स्तर में समायोजित करने के लिए आराम करना चाहिए। हृदय रोग, सांस की बीमारी, मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।

सिर दर्द, जी मिचलाना, दिल की धड़कन तेज होना, उल्टी, हाथ-पैरों का काला पड़ना, थकान, सांस लेने में दिक्कत या खांसी जैसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टरी मदद लेनी चाहिए। एक गोवे के अनुसार

यात्रा शुरू करने से पहले, भक्तों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे गर्म कपड़े ले जा रहे हैं और दिन के दौरान सनस्क्रीन (एसपीएफ़ 50, नही तो काम से काम 30+) का उपयोग करें। धूप के चश्मे का भी प्रयोग करना चाहिए। पानी का नियमित सेवन और का सेवन

राज्य के आंकड़ों के अनुसार, जिले में जितने भी तीर्थयात्रियों की मौत हुई है, वे सभी पैदल यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं की हैं। जब लोग चलते रहते हैं, तो उन्हें ऑक्सीजन के स्तर में अचानक कमी का एहसास नहीं होता है।

Written by
Hill Mail

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