रंगमंच की ‘जान’ चली गई! वह मैदान में पहाड़ की पहचान थे…. ये लोगों के उद्गार हैं ये भावनाएं हैं सोशल मीडिया पर शब्दों के रूप में प्रस्फुटित हो रही हैं। गढ़वाल में जन्मे देश के जानेमाने रंगकर्मी, नाट्य लेखक, साहित्यकार, व्यंग्यकार उर्मिल कुमार थपलियाल नहीं रहे। मंगलवार शाम को उन्होंने लखनऊ स्थित अपने घर पर अंतिम सांस ली। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत कई जानी मानी हस्तियों ने उर्मिल कुमार के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। वह 78 वर्ष के थे और आंतों के कैंसर से पीड़ित थे।
योगी आदित्यनाथ ने लिखा, ‘अपनी प्रतिभा से कला जगत को समृद्ध करने वाले सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं साहित्यकार श्री उर्मिल कुमार थपलियाल जी का निधन अत्यंत दुःखद है। प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने परम धाम में स्थान व शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति!’
अपनी प्रतिभा से कला जगत को समृद्ध करने वाले सुप्रसिद्ध रंगकर्मी एवं साहित्यकार श्री उर्मिल कुमार थपलियाल जी का निधन अत्यंत दुःखद है।
प्रभु श्री राम से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्मा को अपने परम धाम में स्थान व शोक संतप्त परिजनों को यह दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति!
— Yogi Adityanath (@myogiadityanath) July 21, 2021
देवभूमि उत्तराखंड के सीएम धामी ने ट्वीट किया, ‘प्रसिद्ध रंगकर्मी, लेखक, साहित्यकार डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। उनका निधन कला एवं साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है। ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोकाकुल परिजनों को यह असह्य पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करें।’
प्रसिद्ध रंगकर्मी, लेखक, साहित्यकार डॉ. उर्मिल कुमार थपलियाल जी के निधन का दुःखद समाचार प्राप्त हुआ। उनका निधन कला एवं साहित्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को शांति एवं शोकाकुल परिजनों को यह असह्य पीड़ा सहने की शक्ति प्रदान करें। pic.twitter.com/uBAs25i7MH
— Pushkar Singh Dhami (@pushkardhami) July 21, 2021
जैसे ही उनके निधन की खबर मिली, सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि देने का सिलसिला शुरू हो गया। लोग उनके नाटकों और रचनाओं को याद करते हुए अपने उद्गार व्यक्त कर रहे हैं। उनका बचपन अभावों में बीता था। बचपन में वह रामलीला में सीता का किरदार निभाते थे। 1965 में वह लखनऊ आए और आकाशवाणी में काम करने लगे। सोहन लाल थपलियाल के नाम से वह आकाशवाणी में प्रादेशिक समाचार पढ़ते थे। लोग उनके बारे में कह रहे कि वह मैदान में पहाड़ की बुलंद आवाज थे।
रंगमंच एवं हिंदी व्यंग्य विधा को नौटंकी शैली में व्यक्त करने वाले कद्दावर लेखक-नाटककार #उर्मिल_कुमार_थपलियाल जी का निधन दुःखद है।
इन्होंने छह दशकों से ज्यादा समय तक कला-संस्कृति-रंगमंच की सेवा की है।
रंगमंच की दुनिया के इस सशक्त हस्ताक्षर को विनम्र श्रद्धांजलि pic.twitter.com/nr2ND9bYRt— Ravi Kishan (@ravikishann) July 21, 2021
उनके द्वारा निर्देशित चर्चित नाटकों में सूर्य की अंतिम किरण, गुफायें, हनीमून, खूबसूरत बहू, कमला, कागजी है पैरहन, हे ब्रेख्त आदि शामिल हैं। उन्होंने 200 से भी अधिक नाटकों का निर्देशन किया। उन्हें यश भारती, संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी की रत्न सदस्यता और अकादमी पुरस्कार, उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान का कला भूषण व भारतेन्दु हरिश्चंद्र पुरस्कार जैसे सम्मान मिले। उन्होंने कई अखबारों पत्रिकाओं के लिए लेख लिखें।



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