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लॉकडाउन नहीं मान रहे लोग, उत्तराखंड में भी लग सकता है कर्फ्यू

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कोरोना वायरस के खतरे को कुछ लोग गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। ऐसे में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लोगों से फिर अपील की है कि अपने, परिवार और समाज के लिए बेहतर यही है कि घर में रहें और बाहर न निकलें।

कोरोना वायरस के खिलाफ छेड़ी गई जंग में कुछ लोगों के लापरवाह रवैये के चलते पूरे देश में खतरा मंडरा रहा है। मजबूरन कुछ राज्यों को कर्फ्यू लागू करना पड़ा है। इस समय 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लॉकडाउन की भी घोषणा की गई है। उत्तराखंड में भी लॉकडाउन है और सरकार की तरफ मंगलवार को सुबह 7 से 10 बजे तक सभी आवश्यक वस्तुओं की दुकानें खोली गईं। इसके बाद आवश्यक सेवाओं को छोड़ सभी दुकानें एवं संस्थान बंद हैं। साथ ही यातायात के सभी साधन भी बंद हैं।

इस बीच, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने प्रदेश के लोगों से अपील की है कि वे घर में रहें, बाहर ना निकलें और सरकार को कड़े कदम उठाने के लिए बाध्य ना करें- स्वतः ही अपने पर कर्फ्यू लगाएं। सीएम ने कहा कि आप सरकार का सहयोग करें और अपने परिवार और समाज के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी का पूरी ईमानदारी से निर्वहन करें। उन्होंने साफ कहा कि कोरोना के संक्रमण की रोकथाम का सबसे बड़ा इलाज घर बैठना और हाथ धोना है।

सूत्रों के अनुसार, अगर लॉकडाउन की स्थिति में लोगों का सड़कों पर आना नियंत्रित नहीं हुआ तो सरकार ऐहतियातन कर्फ्यू का फैसला ले सकती है।

बता दें कि 14 घंटों के जनता कर्फ्यू के समय तो जनता गंभीर थी लेकिन उसके दूसरे दिन सोमवार को लोग पहले की तरफ सड़कों पर दिखाई दिए। ऐसे में सरकार और प्रशासन को सख्त होना पड़ा है।

सीएम रावत ने एक अन्य ट्वीट में कहा कि अगर खांसी, बुखार, सांस लेने में तकलीफ़ हो और आप किसी संक्रमित व्यक्ति या आइसोलेशन में रखे किसी व्यक्ति के सम्पर्क में भी आए हैं तो तुरंत नज़दीकी डॉक्टर और सरकारी अस्पताल में सम्पर्क करें। सीएम ने डॉक्टरों के कुछ नंबर भी शेयर किए हैं।

इसके साथ ही सरकार की तरफ से लोगों से अपील की जा रही है कि जो भी प्रवासी उत्तराखंडी भाई-बहन अपने गांव आ रहे हैं, वे कृपया अपने आप को कम से कम 10 दिन आइसोलोशन यानी एकांतवास में रखें, यह उत्तराखंड पर आपका बहुत बड़ा उपकार होगा।

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Hill Mail

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