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उत्तराखंड के किसानों को सौगात, अब कहीं भी बेच सकेंगे अपना अनाज

over-7 lakh farmers of uttarakhand got 485 crores

हिल मेल ब्यूरो, देहरादून

पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देने के साथ ही त्रिवेंद्र सिंह रावत सरकार किसानों की आय बढ़ाने पर भी फोकस कर रही है। अब सरकार ने किसानों की आय दोगुनी करने के लिए केंद्र के फार्मूले को अपनाया है। उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम को खत्म कर इसकी जगह केंद्र के कृषि उपज एवं पशुधन विपणन अधिनियम को लागू किया जा रहा है। मंत्रिमंडल ने इसकी मंजूरी दे दी है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए कृषि उत्पादों का व्यापार खुला करने के लिए मॉडल एक्ट को लागू किया है।

इससे किसानों को मंडियों में कृषि उत्पाद लाने की अनिवार्यता नहीं रहेगी। वे अपने उत्पाद को उचित दामों पर मंडी से बाहर कहीं भी बेच सकेंगे। मंडी समिति की ओर से फल-सब्जी व अन्य कृषि उत्पादों के कारोबार पर शुल्क नहीं लिया जाएगा।

इस समय लागू उत्तराखंड कृषि उत्पादन मंडी विकास एवं विनियमन अधिनियम (एपीएमसी) में यह व्यवस्था है कि मंडी समिति के अधीन आने वाले क्षेत्रों में फल-सब्जी के कारोबार पर एक प्रतिशत मंडी शुल्क लिया जाता है। लाइसेंस के बिना कोई भी आढ़ती कृषि उत्पादों का कारोबार नहीं कर सकता है। मॉडल एक्ट में बिना लाइसेंस के भी आढ़ती किसानों का उत्पाद खरीद सकते हैं। इससे नई स्कीम किसानों के लिए लाभकारी रहने वाली है।

उत्तराखंड के किसान अब कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) कर सकेंगे। मंत्रिमंडल ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग एक्ट 2018 को राज्य में लागू करने की मंजूरी दे दी है। इससे कृषि क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियां अपनी जरूरत के अनुसार किसानों से खेती के लिए कॉन्ट्रैक्ट कर सकती हैं।

दरअसल, दक्षिण के कुछ राज्यों की तर्ज पर राज्य में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने एक्ट बनाया है। इस एक्ट के आधार पर प्रदेश में अनुबंध खेती की मंजूरी दे दी है। अब जिन किसानों के पास काफी कृषि भूमि है और वे बुढ़ापे में खेतीबाड़ी नहीं कर सकते हैं तो वे अपनी कृषि भूमि को कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के लिए कंपनी को लीज पर दे सकते हैं। किसान के हितों को सुरक्षित करने के लिए सरकार ने एक्ट में व्यवस्था की है।

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