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चमोली में 8 किमी ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर बीमार महिला को ऐसे अस्पताल ले गए गांववाले

उत्तराखंड में यूं तो सड़कों का जाल बेहतर हुआ है पर आज भी कई दुर्गम इलाकों तक सड़क नहीं पहुंची है। इराणी गांव तक पहुंचने के लिए पहाड़, जलधारा को पार करना पड़ता है। रास्ते भी ऐसे कि नीचे देखकर न चले तो पत्थर से चोट लग सकती है। मुश्किल तब बढ़ जाती है जब गांव में कोई बीमार पड़ता है...

उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण कई इलाकों में पहुंचने के लिए ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। चमोली के सुदूरवर्ती गांव इराणी से एक ऐसी ही तस्वीर सामने आई है जहां एक महिला की तबीयत खराब होने के कारण उन्हें कंधे पर लेकर लोगों को 8 किमी पैदल चलना पड़ा। रास्ते भी ऐसे कि जरा सी नजर चूके तो हादसा हो सकता है। एक-एक तस्वीरें और वीडियो देखिए और समझिए कि पहाड़ों में रास्ता न होने के कारण लोगों को कैसी दिक्कतें आ रही हैं।

4 सितंबर, शुक्रवार को इराणी गांव की रहने वाली जमुना देवी पत्नी मातबर सिंह (25) के पेट में अचानक दर्द शुरू हो गया। गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र न होने के कारण प्राथमिक उपचार का कोई माध्यम नहीं है। पीड़ा असहनीय होती जा रही थी।

 

आनन-फानन में गांव के 15-20 लोगों ने जमुना देवी को कुर्सी पर बिठाया और कंधे पर अस्पताल पहुंचाने का जुगाड़ बनाया।

 

खस्ताहाल रास्तों पर जैसे-तैसे पगडंडियों के सहारे बीमार को पगना नामक जगह पर पहुंचाया। महिला को गोपेश्वर जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है। अब उनकी तबीयत नियंत्रण में बताई जा रही है।

गांववालों ने बताया कि इराणी में एक फार्मासिस्ट की नियुक्ति है लेकिन वह रहते नहीं है। उन्हें चमोली अटैच किया गया है, इसलिए कम ही आते हैं।

हिल-मेल से बातचीत में इराणी के प्रधान मोहन नेगी ने बताया कि महिला की तबीयत अब ठीक है। उन्होंने कहा कि हर महीने लगभग 2 केस ऐसे आते हैं जब कंधे पर लेकर लोगों को मरीजों को अस्पताल पहुंचाना होता है।

 

उन्होंने सरकार से निवेदन किया है कि सड़क का मार्ग जल्द पूरा किया जाए। उन्होंने फार्मासिस्ट या डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति की भी मांग की है।

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Hill Mail

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