मृतकों की पहचान 59 वर्षीय सरस्वती देवी, उनके बड़े बेटे धर्मेंद्र सिंह बिष्ट और छोटे बेटे खुशाल सिंह बिष्ट के रूप में हुई है। तीनों को गंभीर हालत में अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जानकारी के अनुसार, मानपुर निवासी बिष्ट परिवार ने करीब एक माह पहले घर के आंगन में पानी संग्रहण के लिए अंडरग्राउंड टंकी का निर्माण कराया था। मंगलवार शाम करीब छह बजे टंकी की शटरिंग हटाने का काम चल रहा था। सबसे पहले धर्मेंद्र सिंह टंकी के भीतर उतरे। बताया जा रहा है कि अंदर लकड़ी की बल्ली हटाते समय ऊपर से मलबा उनके सिर पर गिर गया। कुछ देर तक बाहर नहीं आने पर छोटे भाई खुशाल सिंह उन्हें देखने के लिए टंकी में उतर गए। टंकी के भीतर बनी जहरीली गैस के कारण वह भी बेहोश हो गए।
जब दोनों बेटे बाहर नहीं निकले तो उनकी मां सरस्वती देवी भी उन्हें बचाने के लिए टंकी में उतर गईं। दुर्भाग्यवश वह भी जहरीली गैस की चपेट में आकर बेहोश हो गईं। देखते ही देखते एक ही परिवार के तीन सदस्य टंकी के भीतर फंस गए।
इसी दौरान पास से गुजर रहे सब्जी विक्रेता भोजराज को धर्मेंद्र की पत्नी ज्योति ने मदद के लिए पुकारा। इंसानियत का परिचय देते हुए भोजराज बिना अपनी जान की परवाह किए करीब दस फीट गहरी टंकी में उतर गए। उन्होंने तीनों के सिर पानी से ऊपर उठाने का प्रयास किया, लेकिन कुछ ही क्षणों में उन्हें भी गैस का असर महसूस होने लगा और चक्कर आने लगे। समय रहते आसपास के लोगों ने उन्हें बाहर निकाल लिया, जिससे उनकी जान बच गई। भोजराज ने बताया कि यदि वह कुछ देर और अंदर रहते तो शायद उनकी भी मौत हो जाती।
स्थानीय लोगों की मदद से तीनों को बाहर निकालकर डॉ. सुशीला तिवारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। अस्पताल में तीनों को मृत घोषित कर दिया गया।
हादसे के बाद अस्पताल का माहौल बेहद भावुक हो गया। मृतक धर्मेंद्र की पत्नी ज्योति बिष्ट का रो-रोकर बुरा हाल था। वह बार-बार अपने बच्चों की ओर इशारा करते हुए कह रही थीं, “मेरे बच्चों का क्या होगा, अब मुझे भी नहीं जीना।” उनकी चीख-पुकार सुनकर अस्पताल में मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।
परिजनों के अनुसार, खुशाल सिंह की पत्नी छह माह की गर्भवती हैं और उनका एक छोटा बच्चा भी है। परिवार ने अभी तक उन्हें पति की मौत की सूचना नहीं दी है। वहीं धर्मेंद्र अपने पीछे सात-आठ वर्ष के एक बेटे और एक बेटी को छोड़ गए हैं। अब दोनों परिवारों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है, क्योंकि घर के दोनों कमाऊ सदस्य इस हादसे में जान गंवा चुके हैं।
घटना की सूचना मिलते ही चोरगलिया पुलिस, प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचे। तहसीलदार कुलदीप पांडे, एसओ तारा सिंह राणा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने पीड़ित परिवार को सांत्वना दी और घटना की जानकारी ली। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लंबे समय तक बंद रहने वाले अंडरग्राउंड टैंक, सेप्टिक टैंक और मैनहोल में जैविक पदार्थों के सड़ने से हाइड्रोजन सल्फाइड, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसी जहरीली गैसें बन जाती हैं। इनमें हाइड्रोजन सल्फाइड कुछ ही सेकंड में व्यक्ति को बेहोश कर सकती है, जबकि ऑक्सीजन की कमी से दम घुटने लगता है। ऐसे स्थानों में बिना सुरक्षा उपकरण और गैस जांच के प्रवेश करना बेहद खतरनाक होता है।
गौलापार की यह दर्दनाक घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि बंद भूमिगत टैंकों में उतरने से पहले आवश्यक सुरक्षा उपाय अपनाना कितना जरूरी है। जरा-सी लापरवाही ने एक परिवार की तीन जिंदगियां छीन लीं और पीछे छोड़ गया कभी न भरने वाला दर्द।


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