सबसे अधिक खराब स्थिति राजकीय आदर्श प्राथमिक विद्यालय धौलियाणा, राजकीय मॉडल प्राथमिक विद्यालय कणोली और राजकीय प्राथमिक विद्यालय कोटी ढुंढसीर की बताई जा रही है। इन विद्यालयों की छतों से लगातार पानी टपकता है, दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और कई जगहों पर गहरी दरारें दिखाई दे रही हैं। बरसात के दौरान कक्षाओं में पानी भर जाने से बच्चों और शिक्षकों को पढ़ाई के साथ-साथ अपनी सुरक्षा की भी चिंता सताती रहती है।
अभिभावकों का कहना है कि वे हर दिन डर के साये में अपने बच्चों को स्कूल भेजते हैं। उनका कहना है कि शिक्षा जरूरी है, लेकिन बच्चों की जान उससे भी अधिक महत्वपूर्ण है। ग्रामीणों का आरोप है कि वर्षों से विद्यालयों की मरम्मत और नए भवन निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
कणोली के ग्रामीण तनुज बड़ोनी ने बताया कि कई बार संबंधित अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से विद्यालय भवनों की मरम्मत तथा नए भवन निर्माण की मांग की गई, लेकिन आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो किसी दिन बड़ा हादसा हो सकता है।
राजकीय प्राथमिक विद्यालय धौलियाणा के प्रधानाचार्य धन सिंह कंडारी ने बताया कि विद्यालय भवन की जर्जर स्थिति को लेकर कई बार विभाग को पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि लगातार पत्राचार के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। विद्यालय में पढ़ाई प्रभावित हो रही है और बरसात के दौरान बच्चों को सुरक्षित स्थान पर बैठाने में भी काफी कठिनाई होती है।
विकासखंड के जिन विद्यालयों की स्थिति सबसे अधिक खराब बताई जा रही है, उनमें राजकीय इंटर कॉलेज खोला कडाकोट, राडागांड, चौकी, कपरोली, बैंजवाड़ी, गोनीखाल, डांग, हाईस्कूल लक्षमोली, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कोटी ढुंढसीर, राजकीय प्राथमिक विद्यालय गवाणा, सिरोली, कणोली, धौलियाणा, जखण्ड, जिवालाखाल और पाव शामिल हैं। इन विद्यालयों में कहीं छतें जर्जर हैं तो कहीं दीवारें कमजोर हो चुकी हैं। कई भवन अपनी आयु पूरी कर चुके हैं और तत्काल मरम्मत या पुनर्निर्माण की आवश्यकता है।
इस संबंध में आरडब्ल्यूडी कीर्तिनगर के कनिष्ठ अभियंता जसवीर सिंह नेगी ने बताया कि कुछ विद्यालयों में अतिरिक्त कक्ष और बरामदा निर्माण के लिए जिला योजना से धनराशि स्वीकृत की गई है। हालांकि मरम्मत कार्य के लिए उपलब्ध बजट पर्याप्त नहीं है। इसी कारण विद्यालयों के आकलन की रिपोर्ट संशोधन के लिए जिला प्रशासन को दोबारा भेजी गई है।
वहीं, प्रभारी खंड शिक्षा अधिकारी डॉ. यशवंत सिंह नेगी ने कहा कि विभाग को जर्जर विद्यालय भवनों की जानकारी है। जिन भवनों की स्थिति अत्यधिक खराब है, वहां बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि नए विद्यालय भवनों के निर्माण के लिए जिला योजना से धनराशि स्वीकृत की गई है और संबंधित प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
हालांकि सवाल यह है कि जब तक निर्माण और मरम्मत का कार्य पूरा नहीं होता, तब तक इन विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा। लगातार हो रही बारिश के बीच जर्जर भवनों में शिक्षा ग्रहण कर रहे मासूमों की चिंता अभिभावकों के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी सताने लगी है। क्षेत्रवासियों ने सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि बरसात के मौसम को देखते हुए जर्जर विद्यालयों की तत्काल मरम्मत कराई जाए या फिर बच्चों की पढ़ाई के लिए सुरक्षित वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि किसी भी संभावित हादसे से बचा जा सके।


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