देहरादून के मालदेवता सरखेत के पास बीते शुक्रवार की रात को भारी बारिश के कारण भारी तबाही देखने का मिली। प्राकृतिक आपदा के बाद सरकार और जिला प्रशासन बचाव कार्य में लगा हुआ है सरकार ने सबसे पहले लोगों को बचाने का कार्य शुरू किया और जल्दी से जल्दी घायलों को अस्पताल पहुंचाया। सरकार ने अधिकारियों को निर्देश दिये कि आपदा में घायलों को तुरन्त अस्पताल पहुंचाया जाये जिससे कि उनका उपचार जल्दी किया जाये।
अब आपदा के एक दिन बाद सरकार इस बात का पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह भंयकर आपदा कैसे आई। इसके लिए वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के वैज्ञानिक इस आपदा के कारणों का पता लगाने में जुट गए हैं। जिससे कि आने वाले समय में इस प्रकार की घटना होने से पहले ही जन-धन को हानि से बचाया जा सके। वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजी के निदेशक डॉ. कालाचॉद साईं ने बताया कि आपदा प्रभावित इलाकों में संस्थान के वैज्ञानिक भूस्खलन समेत तमाम पहलुओं पर अध्ययन कर रहे हैं।

आपदा के बाद अध्ययन करके इस बात की जानकारी जुटाई जा रही है कि पहाड़ों में भारी बारिश होने के बाद इतनी ज्यादा तबाही क्यों हो जाती है। भविष्य में ऐसी प्राकृतिक आपदा आई तो इससे कैसे कम से कम जान माल का नुकसान हो उसके उपाय किये जायें। अगर हम आपदा प्रबंधन विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो उत्तराखंड में 84 ऐसे खतरनाक जोन चिन्हित किए हैं जो भूस्खलन के लिहाज से बेहद संवेदनशील हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक श्री बदरीनाथ यात्रा मार्ग पर 150 किलोमीटर के क्षेत्र में 60 भूस्खलन संभावित जोन हैं। वैज्ञानिक शोधों में यह बात सामने आई है कि मूसलाधार बारिश के चलते यदि मलबे की रफ्तार 260 फीट प्रति सेकंड होती है तो इससे संबंधित क्षेत्र में भारी तबाही मचने की संभावना रहती है। अनुमान लगाया जा रहा है कि मालदेवता सरखेत इलाके में भी इसी रफ्तार से मलबा आया होगा।
मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक एवं वरिष्ठ मौसम विज्ञानी विक्रम सिंह का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र बनने और लो प्रेशर लाइन के उत्तराखंड पहुंचने की वजह से मूसलाधार बारिश होने के साथ ही भारी तबाही हुई। उन्होंने बताया कि गनीमत रही कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय नहीं है। यदि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होता तो और अधिक मूसलाधार बारिश होने के साथ ही भारी तबाही होती। उनके अनुसार अब बंगाल की खाड़ी में निम्न दबाव का क्षेत्र समाप्त हो गया है तो राजधानी दून समेत मैदान से लेकर पहाड़ तक मूसलाधार बारिश की संभावना बेहद कम हो गई है।

इस प्राकृतिक आपदा के बाद सीएम पुष्कर सिंह धामी और कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने घटनास्थल का दौरा किया और उसके बाद आपदा में घायल हुए लोगों का हाल चाल जानने के लिए मैक्स अस्पताल भी गये। तब उन्होंने बताया था कि इस आपदा में अब तक चार लोगों की मृत्यु हुई है। 13 लोग घायल हुए हैं तथा 12 लोग लापता है। 5 गौशाला क्षतिग्रस्त हुई हैं तथा 78 पशु हानि हुई है। उन्होंने बताया गया कि पर्याप्त संख्या में एसडीआरएफ व एनडीआरएफ की टीमें तैनात हैं। रियल टाइम मॉनिटरिंग की जा रही हैं। भूस्खलन से रास्ते बंद होने पर तुरंत खोलने के लिए विभिन्न स्थानों पर जेसीबी आदि लगाई गयी हैं।


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