योगी आदित्यनाथ ने आज दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें कल ही भारतीय जनता पार्टी का विधायक दल का नेता चुना गया था। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। वह लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाम 4:20 मिनट पर अटल बिहारी वाजपेयी इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में पद और गोपनीयता की शपथ ली और उनके साथ कई मंत्रियों ने भी शपथ ली।
योगी आदित्यनाथ ने आज दूसरी बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उन्हें कल ही भारतीय जनता पार्टी का विधायक दल का नेता चुना गया था। राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। वह लगातार दूसरी बार राज्य के मुख्यमंत्री बने हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शाम 4:20 मिनट पर अटल बिहारी वाजपेयी इकाना इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम में पद और गोपनीयता की शपथ ली और उनके साथ कई मंत्रियों ने भी शपथ ली।
योगी आदित्यनाथ के अलावा 52 मंत्रियों ने भी पद और गोपनीयता की शपथ ली। उप मुख्यमंत्री के रूप में केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने पद की शपथ ली। जिन अन्य मंत्रियों को मंत्रीमंडल में स्थान मिला है उनके नाम इस प्रकार हैं सूर्य प्रताप शाही, सुरेश कुमार खन्ना, स्वतंत्र देव सिंह, बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चैधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, नन्द गोपाल गुप्ता, भूपेन्द्र सिंह चैधरी, अनिल राजभर, जितिन प्रसाद, राकेश सचान, अरविन्द कुमार शर्मा, योगेन्द्र उपाध्याय, अशीष पटेल, संजय निषाद, नितिन अग्रवाल, कपिल देव अग्रवाल, रवीन्द्र जायसवाल, संदीप सिंह, गुलाब देवी, गिरीश चन्द्र यादव, धर्मवीर प्रजापति, असीम अरूण, जपीएस राठौर, दयाशंकर सिंह, नरेन्द्र कश्यप, दिनेश प्रताप सिंह, अरूण कुमार सक्सेना, दयाशंकर मिश्र, मयंकेश्वर सिंह, दिनेश खटीक, संजीव गोड, बलदेव सिंह ओलख, अजीत पाल, जसवन्त सैनी, रामकेश निषाद, मनोहर लाल मन्नू कोरी, संजय गंगवार, बृजेश सिंह, केपी मलिक, सुरेश राही, सोमेन्द्र तोमर, अनूप प्रधान ‘बाल्मीकि’ प्रतिभा शुक्ला, राकेश राठौर गुरू, रजनी तिवारी, सतीश शर्मा, दानिश आजाद अंसारी और विजय लक्ष्मी गौतम ने मंत्री पद की शपथ ली।
— Yogi Adityanath (मोदी का परिवार) (@myogiadityanath) March 25, 2022
इस शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के कई केंद्रीय मंत्रियों के अलावा कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने भी हिस्सा लिया। इसके अलावा राज्य के सभी लोक सभा और राज्य सभा के प्रतिनिधि शामिल होंगे। जिन गणमान्य अतिथियों का कोरोना टेस्ट हुआ है उन्हें ही मंच में आने की इजाजत मिली। योगी आदित्यनाथ 37 सालों में ऐसे पहले मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने पांच साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद फिर से सत्ता की बागडोर संभाली है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का असली नाम अजय सिंह बिष्ट है। उनका जन्म 5 जून 1972 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के यमकेश्वर ब्लॉक के एक छोटे से गांव पंचूर में हुआ, उनके पिता का नाम आनंद सिंह बिष्ट हैं। वह वन विभाग से रेंजर के पद से रिटायर हुए और उनका कुछ समय पहले ही निधन हुआ है। योगी आदित्यनाथ की माता सावित्री देवी अपने बच्चों के साथ गांव में ही रहती है। योगी चार भाई और तीन बहनों में दूसरे नंबर के भाई हैं। उनके दो भाई कॉलेज में नौकरी करते हैं, जबकि एक भाई सेना की गढ़वाल रेजिमेंट में सूबेदार हैं।
उन्होंने अपनी अधिकतर पढाई घर से बाहर रहकर ही की थी। कक्षा 9 में वह इंटर कालेज चमकोटखाल के हॉस्टल में रहकर पढ़ाई किया करते थे। सन् 1990 में ग्रेजुएशन की पढ़ाई करते हुए योगी आदित्यनाथ ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद’ से जुड़े। सन् 1992 में श्रीनगर डिग्री कॉलेज से योगी आदित्यनाथ ने गणित में बीएससी की परीक्षा पास की। उसके बाद कोटद्वार में रहने के दौरान योगी आदित्यनाथ के कमरे से सामान चोरी हो गया, जिसमें इनके सनद प्रमाण पत्र भी थे। इस कारण से गोरखपुर से एमएससी साइंस करने का प्रयास असफल रह गया। इसके बाद इन्होंने ऋषिकेश में फिर से विज्ञान स्नातकोत्तर में प्रवेश तो लिया, लेकिन ‘राम मंदिर आंदोलन’ का प्रभाव और स्नातकोत्तर में प्रवेश की परेशानी से उनका ध्यान दूसरी तरफ बंट गया।
योगी आदित्यनाथ सन् 1993 में पढ़ाई के दौरान ‘गुरु गोरखनाथ’ पर शोध करने गोरखपुर आए तथा गोरखपुर प्रवास के दौरान ही महंत अवैद्यनाथ के संपर्क में आए। महंत अवैद्यनाथ योगी आदित्यनाथ के पड़ोस के गांव के निवासी और परिवार के पुराने परिचित थे। योगी आदित्यनाथ महंत अवैद्यनाथ की शरण में चले गए और उनसे पूर्ण दीक्षा प्राप्त की। योगी आदित्यनाथ 21 वर्ष की आयु में सन् 1994 में सांसारिक मोहमाया त्यागकर पूर्ण संन्यासी बन गए, जिसके बाद उनका नाम ‘अजय सिंह बिष्ट’ से ‘योगी आदित्यनाथ’ हो गया। अप्रैल 1994 में मंहत अवैधनाथ जी ने उनको अपना उत्तराधिकारी घोषित किया।
साल 1998 में हुए लोकसभा के चुनाव में वे गोरखपुर संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद चुने गये, उस समय वे सबसे कम उम्र के सांसद थे। इसके बाद वर्ष 1999, 2004, 2009 तथा 2014 के लोकसभा चुनाव में गोरखपुर संसदीय सीट से भारतीय जनता पार्टी के सांसद चुने गए। 12 सितंबर सन् 2014 को गोरखनाथ मंदिर के पूर्व महंत अवैद्यनाथ के निधन के बाद योगी आदित्यनाथ को यहां का महंत बनाया गया। 2 दिन बाद इन्हें ‘नाथ पंथ’ के पारंपरिक अनुष्ठान के अनुसार मंदिर का पीठाधीश्वर बनाया गया। साल 2017 में उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलने पर भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उनको मुख्यमंत्री का दायित्व सौंपा।
यूपी में कानून-व्यवस्था सुधारी
योगी आदित्यनाथ को सख्त प्रशासक माना जाता है। यूपी जैसे बड़े सूबे की जिम्मेदारी संभालने के बाद उन्होंने सबसे ज्यादा जोर कानून-व्यवस्था सुधारने पर दिया। यूपी में कोई भी ऐसी उल्लेखनीय घटना नहीं हुई, जिसे दंगा कहा जाए। प्रदेश में सकारात्मक पहल करते हुए हुए उन्हें यूपी इनवेस्टमेंट समिट का आयोजन किया। यूपी में भेदभाव के बगैर केंद्र सरकार की योजनाएं सभी वंचित वर्गों तक आसानी से पहुंचाई। जन-धन योजना, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान भारत, शौचालय योजना और किसान सम्मान योजना की सफलता ने यूपी में जाति-धर्म के भेद को तोड़ते हुए 2019 के लोकसभा चुनाव में यूपी से एक बार फिर भाजपा को बड़ा जनादेश दिया।
इसके बाद 2022 के विधानसभा में चुनाव में भाजपा ने दो तिहाई जनादेश के साथ सत्ता में वापसी की। अब उन्हें एक बार फिर उत्तर प्रदेश को आगे ले जाने की जिम्मेदारी दी गई है। इन चुनावों के बाद अब उनका इरादा 2024 में होने वाले लोक सभा चुनाओं पर रहेगा जिससे कि एक बाद फिर केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बन सके।
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