Friday , 4 September 2026
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ग्राम पर्यटन से बढ़ेगा रोज़गार: ‘भलू लगद’ की ने की पहल

रोहित नेगी

कल्पना करो कि रोजमर्रा की थकान भरी जिंदगी से दूर कुछ दिनों के लिए आपको ऐसे माहौल में भेज दिया जाय जहाँ सुबह सवेरे का अलार्म पक्षियों का कलरव हो, जहाँ आँखे खोलते ही सूरज की किरणें आपका स्वागत करें, जहाँ आपके और पशु पक्षियों के दिन की शरूआत साथ – साथ हो, जहाँ साँस लेने के लिए ताज़ी हवा और खाने के लिए जैविक खाना हो। कैसा आनंददायी अनुभव है न यह?क्या आप इस अनुभव को नहीं लेना चाहेंगे?

अगर ऐसे अनुभव लेने हैं तो आपको आना होगा ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां शहरों में यह सब एक कल्पना मात्र है। वहाँ ग्रामीण क्षेत्रों में यह रोज की सच्चाई है। रोजमर्रा की भागदौड़ वाली ज़िंदगी से कुछ दिन आराम लेने के लिए ग्राम पर्यटन का यह विचार बहुत ही आनंददायी है। रोजमर्रा की ज़िंदगी से जब हम थक जाते हैं तो कुछ दिनों के लिए ही सही हम माहौल बदलने के बारे में सोचते हैं। अलग.-अलग लोगों के विचार में माहौल बदलने का तरीका अलग होता है। कोई धार्मिक स्थल जाता है, कोई किसी प्रसिद्ध इमारत या प्रसिद्ध जगह के भ्रमण पर, तो कोई किसी रमणीक स्थल को चुनता है। ग्राम पर्यटन भी माहौल बदलने का एक जबरदस्त तरीका है।

पर्यटन से आयेगी गाँव में रौनक

आजकल ग्राम पर्यटन काफी चर्चा में है। ग्रामीण इलाकों का स्वच्छ व सुंदर माहौल प्रत्येक पर्यटक को अपनी ओर आकर्षित करता है। ग्रामीण जीवनशैली को सीखना, इसका अनुकरण करना यहाँ की संस्कृति व सभ्यता से रूबरू होना, कल्पना करने मात्र से आनंददायी लग रहा है।ग्राम पर्यटन को बढ़ावा देने हेतु भलु लगद (फीलगुड) संस्था भी हरसंभव प्रयास कर रही है। और अभी तक तीन सफल प्रयास कर चुकी है। अभी तक तीन बार दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र यहाँ की संस्कृति व सभ्यता से रूबरू हो चुके हैं।

भलू लगद का प्रयास

दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्र भलु लगद (फीलगुड)संस्था के संस्थापक सुधीर सुन्द्रियाल और उत्तराँचल एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका के सहयोग से गवाणी क्षेत्र में पहुँचे। सबकी नजर में ये पर्यटक स्वर्ग की सैर कर रहे थे। मैंने एक दिन ऐसे ही पूछ लिया कैसा लग रहा है यहाँ पर तुम लोगों को सबका जवाब यही था कि. दीदी दिल्ली के प्रदूषण में हमारी जिंदगी के जो दस दिन कम हो गए थे यहाँ आकर फिर से वापस मिल गए हैं। वाकई उनके उस वाक्य में सच्चाई थी। अगर आप किसी चर्चित जगह पर पर्यटन हेतु जाते हैं तो भीड़- भाड़, लोगों का कलरव वहाँ की शान्ति को भंग कर लेते हैं। वहाँ पर सुंदरता तो होती है पर स्वच्छता और शांति मिलती है कि नहीं इस बात पर संदेह है। इसके विपरीत अगर आप ग्राम पर्यटन का लक्ष्य रखते हैं तो आपको एक साथ कई फायदे हो जाते हैं, शुद्ध हवा, शुद्ध जल, प्राकृतिक वनस्पति, खाने के लिए शुद्ध आहार, आंखों को आराम देने हेतु विभिन्न दृश्य यह सब सोचने में ही मनभावन हैं तो अगर इसका अनुभव लिया जाए तो कितना सुखद होगा।

इसके साथ. साथ यह भी कि शहर और गाँव की संस्कृति और सभ्यता बहुत भिन्न हैं। ग्राम पर्यटन का उद्देश्य लेकर हम वहाँ की सभ्यता संस्कृति, मेले, पर्व, बोली-भाषा, रहन-सहन, आदि को जानने के उद्देश्यों को भी पूरा कर सकते हैं। यह तो हुई पर्यटकों की बात। ग्राम पर्यटन न केवल पर्यटकों बल्कि यहाँ के स्थानीय लोगों दोनों के लिए ही लाभदायक है। एक तरफ पर्यटक ग्रामीण क्षेत्र में आकर अपने आप को आनन्दित महसूस करेगा दूसरी तरफ पर्यटन को बढ़ावा देकर यहाँ के स्थानीय लोग अपने रोजगार को नयी दिशा दे सकते हैं। पलायन का जो बुरा असर ग्रामीण क्षेत्रों में हुआ है, उस असर में मलहम का काम करेगा ग्राम पर्यटन। ग्रामीण क्षेत्रों में जो खालीपन धीरे धीरे आरहा है, उस खालीपन को भरने का यह जबरदस्त तरीका है।

कैसे हो शुरुआत

जरूरी नहीं कि ग्राम पर्यटन केवल चर्चित और प्रसिद्ध जगहों पर ही हो। ग्राम पर्यटन हेतु साधारण सी जगह को, साधारण से गांव को भी चुना जा सकता है। हर ग्राम की कोई न कोई विशिष्ट बात होती है। इसी विशिष्टता को लेकर इसे ग्राम पर्यटन हेतु तैयार किया जा सकता है। कुछ चुनिंदा जगहों को भ्रमण स्थल का रूप दिया जा सकता है। किसी विशिष्ट मंदिर या देवस्थल को धार्मिक स्थल का रूप दिया जा सकता है। ग्राम पर्यटन एक साथ कई लक्ष्यों को पूरा करता है। ग्राम पर्यटन में समुदाय पर्यटन ;किसी समुदाय विशेष की जानकारी हेतु, कृषि पर्यटन ;कृषि आदि की जानकारी हेतु प्रकृति पर्यटन,प्रकृति के विविध नजारों को देखने हेतु, संस्कृति पर्यटन ,ग्रामीण संस्कृति से रूबरू होने हेतु,भोजन पर्यटन,खान-पान आदि की जानकारी हेतु, साहसिक पर्यटन ,किसी इलाकों के साहसिक भ्रमण हेतु आदि सम्मिलित हैं। ग्रामीण पर्यटन इन सभी पर्यटनों का सम्मिलित रूप है। ग्राम पर्यटन से गाँव हरे भरे और खुशहाल तो होंगे ही इनमें रोजगार की एक नयी क्रांति आएगी। पर्यटकों के खाने-पीने, रहने आदि के इंतजाम से लेकर उन्हें विभिन्न स्थलों में ले जाने हेतु गाइड का काम पर्यटकों की आवाजाही हेतु गाड़ी टैक्सी की सुविधा यह सब ग्रामीण लोगों के लिए रोजगार की नई राह खोलेंगी। एक गाइड के रूप में भी रोजगार मिलने की अपार संभावनाएं ग्राम पर्यटन दे सकता है। भलु लगद (फीलगुड) संस्था से पर्यटकों की सुविधा हेतु स्थानीय युवकों को गाइड के तौर पर काम मिला। निर्मला सुन्द्रियाल, दिव्या बुड़ाकोटी, ममता नेगी व वन्दना बिष्ट ये सभी गाइड की भूमिका में रहे।

भलू लगद

 

 

 

 

भलु लगद (फीलगुड) संस्था द्वारा ग्रामीण पर्यटन हेतु जो प्रयत्न किए गए वो काफी सराहनीय एवं सफल प्रयत्न थे। बात ग्रामीण पर्यटन की है तो भलु लगद(फीलगुड) संस्था ने आये हुए पर्यटकों को होटल में न ठहरा कर ग्रामीण परिवेश में ठहराया ताकि वे ग्रामीण जन-जीवन व लोगों को भली भाँति समझ सकें। यह कदम पर्यटकों के समुदाय पर्यटन के उद्देश्यों को पूर्ण करता है। कृषि पर्यटन हेतु पर्यटकों को उन स्थलों का भ्रमण करवाया गया जहाँ कृषि हेतु विभिन्न प्रयास किये जा रहे हैं। इसमें ग्राम गवाणी, ग्राम डबरा व ग्राम गडोली मुख्य रूप से हैं। पर्यटक कहीं घूमने निकले हों और उन्हें प्रकृति के आकर्षक रूप न दिखाई दें यह बात ग्रामीण क्षेत्र में मुश्किल है परंतु इस उद्देश्य की पूर्ति हेतु रायसेरा, विड़ियाडांग शिवालय व नेदिनी मुख्य रूप से थे। संस्कृति पर्यटन के उद्देश्य पर्यटकों ने ग्राम गवाणी में ही पूरे कर लिए थे जहाँ महिलाओं ने थड्या चौंफला नृत्य किया व उनको भी सिखाया, ग्रामीणों से बातें करने के दौरान उन्हें यहां की संस्कृति व सभ्यता को समझने के बहुत से अवसर मिले। पर्यटकों के भोजन पर्यटन के उद्देश्य की पूर्ति हेतु उन्हें यहाँ के विभिन्न भोज्य पदार्थ खाने हेतु मिले, रोज के खाने में नये व स्थानीय पकवान परोसे जाते थे, ग्राम चरगाड में यहाँ की प्रसिद्ध मिठाई अरसा पर्यटकों हेतु बनाई गई। जहाँ तक साहसिक पर्यटन की बात है तो यह काम पर्यटक रोज ही करते थे। रोज चढ़ाई चढ़ना व उतरना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्हें तरह-तरह के टास्क देकर उनके साहस को बढ़ाना व डर को कम करना यह काम भी भलु लगद (फीलगुड) संस्था द्वारा किये गए।

आभार: शुभा बुड़ाकोटी डंडरियाल

Written by
Y S Bisht

लखनऊ यूनिवर्सिटी से ग्रेजुएशन करने के बाद कई टीवी प्रोग्राम के लिए काम किया। एशिया डिफेंस न्यूज़ इंटरनेशनल (अडनी) से जुड़े। यह एजेंसी हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू, मणिपुरी और असमिया में अपनी सेवाएं देती है। इसके अलावा एशिया डिफेंस न्यूज के नाम से एक मासिक पत्रिका भी निकालती थी। वर्ष 2013 में जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर हिल-मेल वेबसाइट शुरू की। फरवरी 2016 से हिल-मेल में बतौर संपादक कार्यरत। मूल रूप से पौड़ी गढ़वाल के निवासी हैं।

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