हिल-मेल ब्यूरो
मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सरकार के अधीन सभी सेवाओं में समूह ग की सीधी भर्ती के पदों पर राज्य के स्थायी निवासियों को प्राथमिकता देने का फैसला कर मास्टर स्ट्रोक खेल डाला। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लिया गया यह निर्णय आने वाले समय में कई मायने रखेगा।
राज्य में अब उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की परिधि के अन्तर्गत तथा लोक सेवा आयोग की परिधि के बाहर समूह ’ग’ के सीधी भर्ती के पदों पर भर्ती हेतु आवेदन करने के लिए वही अभ्यर्थी पात्र होगा, जिसने अपनी हाई स्कूल एवं इंटरमीडिएट अथवा इनके समकक्ष स्तर की शिक्षा, उत्तराखंड राज्य में स्थित मान्यता प्राप्त संस्थानों से प्राप्त की हो।
इसके साथ ही सैनिक और अद्र्वसैनिक बलों में कार्यरत तथा राज्य सरकार अथवा उसके अधीन स्थापित किसी राजकीय और अर्द्धशासकीय संस्था में नियमित पदों पर नियमित रूप से नियुक्त कार्मिकों एवं केन्द्र सरकार अथवा केन्द्र सरकार के सार्वजनिक उपक्रमों में नियमित पदों पर नियमित रूप से उत्तराखंड में कार्यरत ऐसी कर्मी, जिनकी सेवाएं उत्तराखंड से बाहर स्थानांतररित नहीं हो सकती हों, स्वयं अथवा इनके पुत्र एवं पुत्री समूह ’ग’ के पदों पर आवेदन हेतु पात्र माने जायेंगे।
दरअसल, सरकार ने स्थानीय युवाओं को समूह ग भर्ती में वरीयता देने के उद्देश्य से सेवायोजन कार्यालय में पंजीकरण का प्रावधान किया था, जिसे हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया था। राज्य सरकार पर स्थानीय युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर मुहैया कराने के लिए इसके बाद से लगातार दबाव पड़ रहा था।
प्रदेश सरकार द्वारा लिए गये इस निर्णय से राज्य से होने वाले युवाओं के पलायन को रोकने में मदद मिलेगी तथा युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध हो पायेंगे। राज्य के युवाओं के व्यापक हित में राज्य सरकार की यह पहल निश्चित रूप से प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को राज्य की मुख्य धारा से जोडने में भी मददगार होगी।


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