उत्तराखंड के चमोली जिले में दस हजार फीट से ज्यादा की उंचाई पर स्थित बदरीनाथ धाम के कपाट वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा अर्चना के बाद 17 नवम्बर को 4 बजकर 34 मिनट पर श्रृद्धालुओं के लिये बंद कर दिये गये। इससे एक दिन पहले धाम के रावल ईश्वरन नंबूदरी ने माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना संपन्न की। इस मंदिर को करीब 20 कुंतल गेंदे के फूलों से सजाया गया। इस मौके का साक्षी बनने के लिए हजारों श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच चुके थे। इसी के साथ इस वर्ष की गढवाल हिमालय की चारधाम यात्रा का समापन भी हो गया।
मुख्य पुजारी रावल द्वारा विशेष पूजा अर्चना करने और कपाट बंद करने के समारोह के दौरान मंदिर समिति के अध्यक्ष गणेश गोदियाल, धर्माधिकारी और प्रशासनिक अधिकारियों के अलावा मंदिर परिसर में करीब आठ हजार श्रृद्धालु भी मौजूद रहे। इससे पूर्व गर्भगृह से भगवान उद्धव, कुबेर व गरुड़ की उत्सव मूर्तियों को चांदी की डोली में रखा जाता है। इस दौरान धृत लेप कंबल को भगवान बदरीविशाल और मां लक्ष्मी को ओढ़ाया जाता है। इसी के साथ कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
कपाट बंद होने के बाद भगवान विष्णु की डोली उनके शीतकालीन प्रवास जोशीमठ के लिये रवाना कर दी गयी जहां अगले छह माह श्रृद्धालु उनके दर्शन कर सकेंगे। बदरीनाथ के कपाट बंद होने के साथ ही देश विदेश से लाखों श्रृद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करने वाली गढवाल हिमालय की वार्षिक चारधाम यात्रा का भी आज समापन हो गया।
गौरतलब है कि तीन अन्य धामों, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट शीतकाल के लिये पहले ही बंद हो चुके हैं। उत्तरकाशी जिले में स्थित मां गंगा के धाम गंगोत्री मंदिर के कपाट 12 नवम्बर को दीवाली के अगले दिन और उत्तरकाशी जिले में ही स्थित यमुनोत्री मंदिर तथा रूद्रप्रयाग जिले में स्थित भगवान शिव के धाम केदारनाथ के कपाट 13 नवम्बर को श्रृद्धालुओं के लिये बंद किये गये थे।
हिलमेल ब्यूरो


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