उत्तराखंड में पलायन, भ्रष्टाचार, ऑल वेदर रोड, विकास, पर्यटन और केदारनाथ के पुनर्निर्माण से जुड़े मुद्दों पर राज्य के मुखिया त्रिवेंद्र सिंह रावत ने खुलकर अपनी बात रखी। अनुराग पुनेठा से उनकी खास बातचीत के कुछ अंश:
• आपने 150 दिन का कार्यकाल पूरा कर लिया है इस कार्यकाल को आप कैसे देखते हैं।
जब हम कोई चुनाव जीतकर आते हैं तो हम कुछ मुद्दों को लेकर लोगों के बीच जाते हैं और अगर हम पिछले चुनाव का मुख्य मुद्दा देखें तो वह था भ्रष्टाचार। भ्रष्टाचार मुक्त विकास। हमने राज्य के लोगों से वादा किया कि अगर आप भाजपा को सरकार बनाने का मौका देते हैं तो हम भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाएंगे और भ्रष्टाचार विकास हम राज्य को देंगे। लगभग डेढ़ साल के कार्यकाल के दौरान हमने भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाया है। हमने भ्रष्टाचारियों को जेल में भेजा है, 50 से ज्यादा लोग आज जेल के अंदर हैं। जिनमें कई वरिष्ठ अधिकारी हैं, कुछ कनिष्ट लोग हैं, और कुछ अन्य लोग हैं। एनएच 74 में जो मुआवजा घोटाला हुआ उसमें 22 लोग जेल के अंदर हैं और एक अनुमान के अंर्तगत उसमें सवा दो करोड़ का भ्रष्टाचार पाया गया है और उसमें जांच अभी चल रही है। जांच प्रारम्भ समय पर हुई। मैंने मुख्यमंत्री निवास में प्रवेश भी नहीं किया था, हमने उसकी जांच शुरू करवा दी थी। नहीं तो यह घोटाला कई करोड़ तक जाता। जो लोग भ्रष्टाचारी हैं उन्हें अभी तक जमानत तक नहीं मिली और जो लोग बिचौलिए हैं आज वो चाहते हैं कि पैसा हम वापस लौटा दें और किसी तरह से हम जेल जाने से बचें। अभी तक पांच करोड़ के लगभग पैसा वापस भी आया है। कुछ लोग देश छोड़कर और कुछ लोग लंबी छुट्टी चले गए। यानि कि भ्रष्टाचारियों के मन में जो भय होना चाहिए उस भय को कायम करने में हम कामयाब हुए हैं और आज हम राज्य को भ्रष्टाचार मुक्त विकास दे रहे हैं। मुझे लगता है कि सबसे पहले भ्रष्टाचारियों पर प्रहार करने की जरूरत है। भ्रष्टाचार से सबसे ज्यादा खामियाजा गरीब को भुगतना पड़ता है।
• आप पलायन की खासतौर पर बात करते हैं। पलायन को आप कैसे देखते हैं?
हमने सरकार बनाने ही एक पलायन आयोग का गठन किया है और पलायन ने एक एक गांव में जाकर वहां कितने लोगों का पलायन हुआ। वह आसपास के किसी सुविधाजनक स्थान पर हुआ या राज्य के अंदर हुआ या राज्य के बाहर या फिर देश के बाहर। उन सब चीजों का लगभग 16,000 गांवों में जाकर अध्ययन किया और पलायन का क्या कारण रहा उसको जानने की कोशिश की। मैने विधान सभा में जब पहला भाषण किया था तो वह पलायन के ऊपर ही था। पलायन के मुख्य कारण क्या हैं वह थे शिक्षा, स्वास्थय और रोजगार। ए तीन कारण शुरू से मेरे सामने आया और अध्ययन में भी लोगों ने यही तीन कारण बताए हैं। हमने सबसे पहले उसका अध्ययन किया और अब हम उस पर रणनीति बना रहे हैं। दूसरी बात जो राज्य का आर्थिक सर्वेंक्षण हैं। 17 वर्षों में हमने पब्लिक जो चुनकर भेजती है हमने उसका विश्वास में नहीं लिया। जनता के बीच में आर्थिक सर्वेक्षण कराया और जनता को राज्य की आर्थिक स्थिति से अवगत कराया। पलायन केवल इसलिए जरूरी नहीं कि लोगों को गांव में रहना है पलायन रोकना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि हमारे राज्य की 600 किमी सीमा अपने पड़ोसी देशों से लगती है। कई बार पड़ोसी देश के लोग राज्य में आते हैं। हमारा मानना है कि सीमांत गांवों में लोगों का रहना बहुत जरूरी है वह सेना का मनोबल बढाने का भी काम करते हैं और सेना को सूचना देने का काम भी करते हैं। हमारे गांवांे से पलायन न हो इसके लिए हमने गांवों में एक ग्रोथ सेंटर पर काम कर रहे हैं। कि वहां पर नेचुरल रिसोर्स क्या है, हमारे गांवों में जो आर्गेनिक खेती हो रही है उसको कैसे मार्केट में लाएं और तीसरा यह है कि हम वहां पर कुछ और क्या पैदा कर सकते हैं। वह चीजें क्या हो सकती हैं। ग्रोथ सेंटर से उस सामान को सही करके उसकी ब्रैडिंग की जाएगी तो उसके कारण उसका एक अच्छा मूल्य उन लोगों को मिलेगा। इसके अलावा हमारे सरकारी कार्यालयों में वर्दियां हैं जैसे पुलिस, डाक्टर, नर्स, स्कूल की होती है और फिर एक मार्केट है रेडीमेंट ग्रामेंट। हमारे जो ग्रोथ सेंटर हैं वहां हम महिलाओं, नौजवानों, सेवानिवृत सैनिकों को सिखाएं कि कोई काम करना चाहता है कि उनकी ऊर्जा का इस्तेमाल हम इस दिशा में कर सकते हैं। उदाहरण के लिए हमने देवभूमि प्रसाद चालाया। अभी मेरी केदारनाथ के जिलाधिकारी से बात हुई थी उन्होंने मुझे बाताया कि इस बार हमारा डेढ़ करोड़ रूपए का प्रसाद बिका है और इसकी मार्केटिंग महिलाओं ने की है और इससे प्रत्येक महिला को हर महीने 12 हजार रूपए की आमदनी हो रही है। इससे वहां के किसानों को भी फायदा हो रहा है जो चैलाई पहले 15-20 रूपए भी नहीं बिकती थी वह अब 55 रूपए किलो बिक रही है। इसका फायदा किसानों और गांव की महिलाओं को हो रहा हैं। हमारे राज्य में प्रोफोजिजम की भी कमी है और इसको बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है।
• आपने पर्यटन को उद्योग का दर्जा देने की बात भी कही है?
अगर हम इस साल के पर्यटन को देखें तो जो पर्यटक यहां छह महीने में आते थे वह इस साल 46 दिनमें यहां आए हैं। उत्तराखंड में पर्यटकों का अपेक्षा के अनुरूप विश्वास बढ़ा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद और पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने राज्य का दौरा किया और इससे राज्य में आने वाले पर्यटकों में विश्वास बढ़ा है और इससे यात्रियों की संख्या में बड़ी वृद्धि हुई है। मुझे लगता है कि उत्तराखंड पूरे भारत में पर्यटन के क्षेत्र में बहुत आगे बढ रहा है और आने वाले समय में यहां पर्यटकों की संख्या में भारी वृद्धि होगी। हमने पर्यटन को एक तो उद्योग का दर्जा दिया है। पर्यटन में हमने एमएएसपी में शामिल किया है। होम स्टे को हमने इसमें शामिल किया है। हमने होम स्टे को बढ़ावा दिया है और आज यह बड़ी तेजी के साथ बढ़ रहे हैं। हमने अगले कुछ समय में 5000 होम स्टे बनाने का लक्ष्य रखा है। जैसे देश और विदेशों में किए जाते हैं। हमने एक नारा दिया है 13 डिस्ट्रिक 13 न्यू डेस्टीनेशन। हमारे पुराने पयर्टन स्थल काफी विकसित हैं इसके अलावा यह काफी ओवर लोडेड हो गए हैं। इसमें हमने नए डेस्टीनेशन की खोज की है। इसके लिए राज्य को आर्थिक रूप से काफी पैसों की जरूरत होगी। हम लोग इंवेस्टर को आमंत्रित करेंगे आप यहां पर इंवेस्ट कीजिए हमारे लोगों को कारोबार दीजिए। क्योंकि सर्विस सेक्टर में उत्तराखंड का नागरिक हर दुनिया में नजर आता है। प्रधानमंत्री ने इसका जिक्र भी किया है। आज यहां पर बड़े उद्योगपति अपना पैसे लगाने के लिए तैयार हैं।
• ऑल वेदर रोड़ का काम कैसे चल रहा है और इसमें बहुत सारे पेड़ काटे जा रहे हैं इसको आप कैसे देखते हैं?
ऑल वेदर रोड़ की प्रगति एक बहुत अच्छी है और लोग इस चीज को मानते हैं। इसमें कुछ दिक्कते आई हैं एनजीटी की ओर से पेड़ काटने को लेकर। एक तो मैं यह बताना चाहता हूं कि उत्तराखंड एक ऐसा राज्य है जिसमें वन क्षेत्र लगातार बढ़ा है उसमें कोई कमी नहीं आई है और उत्तराखंड का पर्यावरण के प्रति एक स्वाभाविक लगाव है। क्योंकि हमारा जो जीवन है वह काफी हद तक वनों पर आधारित है। इसलिए उत्तराखंड का वो व्यक्ति चाहे वह पढ़ा लिखा है, चाहे कम पढ़ा लिखा और चाहे अपनढ। सभी लोग समझते हैं कि वन हैं तो हम हैं। अगर वन नहीं होंगे तो हमारा जीवन नहीं हो सकता है। यह बहुत अच्छी तरह से महसूस करते हैं और यह मैं कई बार यह भी कहता हूं कि उत्तराखंड वालों को यह बात सिखाने की जरूरत नहीं है पढ़ाने की जरूरत नहीं है उसमें स्वाभाविक रूप से वह गुण होता है। फिर भी हम जो प्रोजेक्ट बनाते हैं तो उसके कुछ मानक हैं जैसे हम 10 पेड़ काटते हैं तो 100 पेड़ लगाते हैं। उसके अलावा हमने दो नदियां देहरादून की रिस्पना से रिऋिपर्णा। आज बरसात के कुछ दिनों के अलावा उसमें पानी नहीं रहता। तो हमने कहा कि उसमें दोबारा से पहले जैसे बनाने की कोशिश करेंगे। उसमें हमने एक दिन में 2.5 लाख पेड़ लगाए हैं और हमने कोसी में 1.65 लाख पेड़ लगाए हैं। इस बात का सर्वेक्षण हमने द्रोण कैमरों के द्वारा किया था। ऐसे ही काम के लिए मैंने जिलाधिकारियों को भी निर्देश दिए कि कैसे सूखी पड़ी नदियों को कैसे जिन्दा किया जा सकता है। हमने इस साल 80 करोड़ लीटर से ज्यादा पानी का संचय किया है और पिछले साल हमने 40 करोड़ लीटर एक विशेष समय में किया था। हम पर्यावरण की दिशा में अच्छा काम कर रहे हैं। शिवाय गंगोत्री और उत्तरकाशी को छोड़कर।
• केदारघाटी को लेकर भी प्रधानमंत्री लगातार निगरानी करते रहते हैं। आपकी सरकार आने के बाद आप केदारघाटी को कैसे देखते हैं ?
केदारघाटी में इन डेढ़ साल में बड़ा और तेजी से काम हुआ है। मुझे लगता है कि इस समय हम 200 करोड़ से ज्यादा का काम कर रहे हैं। प्रधानमंत्री ने शकराचार्य की समाधि को भव्य बनाने के लिए कहा है और उनका कहना है कि इसको एक संग्रहालय के रूप में बनाया जाना चाहिए। इस संग्रहालय में साहित्य और शंकराचार्य से जुड़ी चीजें भी होनी चाहिए। उन्होंने भारत को देश को एक धागे में बाधने में अहम भूमिका निभाई। आदि शकराचार्य जी ने देश और धर्म के बारे में जो कुछ भी बताया उससे लोगों को ज्ञान लेना चाहिए और उनके विचारों को अनुसरण करना चाहिए। केवल केदार मंदिर में जाकर वहां पुष्प चढ़ाए जाने से काम नहीं चलेगा। संग्राहालय का डिजाइन का काम भी लगभग पूरा हो गया है। केदारघाटी में सड़क और रास्ते अक्टूबर माह तक बन जाने की उम्मीद है। हमने प्रधानमंत्री के कहने पर यहां पर एक ध्यान केंद्र भी बनाया है जो सरस्वती नदी के दाई ओर बना है। प्रधानमंत्री ने कहा है कि यहां 5-7 गुफाएं और बनाई जानी चाहिए जिससे कि लोग यहां आकर ध्यान कर सकें। सड़क का काम काफी हद तक पूरा हो गया है ओएनजीसी ने 6 से 8 मीटर चैड़ी सड़क बनाई है। केदारनाथ में इस बार बद्रीनाथ से ज्यादा पर्यटक गए और इसके लिए लोगों ने राज्य सरकार की प्रशंसा की है।
• उत्तराखंड बनने के बाद कई सरकारें आई। आप अपने कार्यकाल को कैसे याद रखना चाहते हैं और आपका विजन क्या है ?
मेरा स्पष्ट सोचना है कि भ्रष्टाचार के लिए जगह नहीं होनी चाहिए। सभी लोग उत्तराखंड को देवभूमि से जानते हैं। हमारा पहला प्रहार भ्रष्टाचार पर है। हम भ्रष्टाचार मुक्त विकास चाहते हैं। भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर काम करना चाहते हैं। जैसे हम सीपैक लाए उत्तराखंड में। आज उसमें क्लासेस शुरू हो रही हैं। न्यू डेस्टीनेशन पर काम किया हम लोग ऋषिकेश में एक इंटरनेशनल कंवेशन सेंटर बना रहे हैं। 20 हजार करोड़ की भूमि जो अभी तक भारत सरकार के अधीन थी हमने उसको लेने में सफलता मिली है। हमारे राज्य में जो चीड़ की पत्तियां अभिशाप बन गई थी। अब हमने उन पत्तियों से तेल बनाने, जो सड़क, उद्योगों के लिए उससे बिजली बनाने और जो हमारे यातायात के साधन हैं उसके लिए डीजल बनेने का काम करेगी। ए बायो हैं और बाई प्रोडक्ट हैं। और जब चीड़ में आग लगती है तो जंगल नष्ट हो जाते हैं। हमारे जानवरों को इससे बड़ी हानि होती है। पर्यावरण को इससे भारी नुकसान होता है। चारों तरफ गर्मी बढ़ जाती है। जो पर्यावरणीय क्षति है वह तो अतुल्यनीय है। उसका हमने सद्पयोग करके उसके लिए हमने अब एक नीति भी बनाई है। कुछ लोगों ने लाइसेंस के लिए निवेदन किया है। लगभग 150 मेगावाट बिजली हमें पिरूल से पैदा हो जाएगी और जो पर्यावरणीय लाभ होगा, वह अलग है। प्रकृति ने हमें जो दिया है हम प्रकृति को नुकसान किए बगैर और उससे जो भी लाभ हम ले सकें, वह हम लंे। हम लोग उन योजनाओं को अच्छे से राज्य में लागू करना चाहते हैं। स्वास्थय में हमने अच्छी उपलब्धि हासिल की है। पहले हमारे पास केवल 50 प्रतिशत डाक्टर ही उपलब्ध थे इस साल हमें 75 प्रतिशत डाक्टर उपलब्ध हुए हैं। हम शिक्षा और स्वास्थय के क्षेत्र में काफी आगे बढ़ चुके हैं।


Leave a comment