राज्य में 2 अक्टूबर से राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना लागू कर दी जाएगी। इसमें राज्य के 62 लाख लोग लाभान्वित हो रहे हैं। शेष रह गये लगभग 67 लाख लोगों को राज्य खाद्य सुरक्षा योजना के तहत रखा जाएगा। बीजापुर हाउस में प्रदेश में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के क्रियान्वयन के संबंध में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि हर जरूरतमंद को खाद्य सुरक्षा उपलब्ध करवाना राज्य सरकार का दायित्व है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के लागू होने के बाद यदि ऐसी बात सामने आती है कि इसमें किसी परिवार को खाद्यान्न की मात्रा पहले की तुलना में कम हो गई है तो इसके उपाय पर भी विचार किया जाए। उन्होंने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के दायरे से बाहर रहने वाले राशनकार्ड धारकों का भी डिजीटाईजेशन करने के निर्देश दिए।
उत्तराखंड में लगभग 62 लाख लोग राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना के तहत आ रहे हैं। इस योजना में अन्त्योदय व प्राथमिक परिवार दो श्रेणियां रखी गई हैं। केंद्र सरकार के मानकों के अनुरूप प्रति सदस्य 5 किग्रा खाद्यान्न मिलेगा। जबकि राज्य सरकार द्वारा इस योजना से पहले अपने स्तर से प्रति परिवार 15 किग्रा खाद्यान्न उपलब्ध करवाया जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री रावत ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा योजना के लागू होने के बाद इस बात का अध्ययन कर लिया जाए कि किसी परिवार को मिल रहे खाद्यान्न की मात्रा 15 किग्रा से कम तो नहीं हो रही है। यदि ऐसा होता है तो इसके समाधान का रास्ता निकाला जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना से बाहर रह रहे एपीएल परिवारों का भी डिजीटाईजेशन तेजी से कर लिया जाए। वर्तमान में इसमें 10 किग्रा गेहूं व 5 किग्रा चावल उपलब्ध करवाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य में परिवारों में चावल अधिक प्रचलित है। दूसरी ओर हमें गेहूं भारत सरकार से बाजार दर पर क्रय करना पड़ता है। इसलिए राज्य खाद्य सुरक्षा योजना में गेहूं व चावल की मात्रा को अंतर्परिवर्तीत करते हुए 5 किग्रा गेहूं व 10 किग्रा चावल कर दिया जाए। चावल राज्य के मिलों से क्रय किया जा सकता है।
इस बैठक में खाद्य मंत्री प्रीतम सिंह, मुख्य सचिव राकेश शर्मा, प्रमुख सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी, एस रामास्वामी, सचिव एमसी जोशी सहित खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के अधिकारी उपस्थित थे।
हिलमेल ब्यूरो


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